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सरहदों की पड़ताल कर रहे हैं हजारों स्वयंसेवक

Thu, 22 Nov 2012 01:41 PM IST
शशांक वर्मा/आगरा
शशांक वर्मा/आगरा Updated Thu, 22 Nov 2012 01:41 PM IST
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लगभग दस हजार स्वयंसेवक इन दिनों भारत से लगे सभी देशों की सीमाओं की खैरखबर ले रहे हैं। ‘सरहद को प्रणाम’ कार्यक्रम के तहत संघ ने इस पूरे कार्यक्रम को बड़े ही गोपनीय तरीके से संचालित किया है।

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देश की सीमाओं की वास्तविक स्थिति क्या है, वहां का जीवन कैसा चल रहा है, इस तरह की तमाम जानकारियां जुटाने और सीमा पर रह रहे लोगों का हौसला बढ़ाने को संघ ने यह कार्यक्रम कई महीने पहले बनाया था। चूंकि कार्यक्रम को गुपचुप तरीके संचालित करना था, इसीलिए स्वयंसेवकों को टुकड़ियों में भेजा गया है।
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एक टुकड़ी में 30 से 35 सदस्य हैं। हर जिले से एक टुकड़ी भेजी गई है। प्रांतों के सीमावर्ती जिलों के सदस्यों को दूसरे छोर की सीमा पर भेजा गया है। आगरा महानगर, रामबाग आदि इलाकों के सदस्य मेघालय, राजस्थान से लगी सीमाओं पर भेजे गए हैं।
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सूत्रों के अनुसार सीमा पर जाने वाले सदस्यों को पहले प्रशिक्षण दिया गया है। 18 से 35 वर्ष के उन्हीं युवाओं का चयन हुआ है, जो बिना रुके लगभग 10 किलोमीटर पैदल चल सकें। उनके स्वास्थ्य का कई बार परीक्षण भी हुआ है। प्रशिक्षण में उन्हें यहां तक बताया गया है कि सीमा पर जाकर लोगों से क्या बातें करनी हैं, क्या नहीं करनी हैं।


स्वयंसेवक अपने घरों से जल लेकर गए हैं, जिसे सरहद पर चढ़ाएंगे और वहां की मिट्टी से तिलक लगाकर लौटेंगे। सरहद पर वे तीन दिन बिताएंगे। सरकार इस कार्यक्रम में अड़ंगा न लगाए, इसीलिए तैयारियों से लेकर सीमा पर भेजने तक का कार्यक्रम गुपचुप रखा गया। लौटने के बाद टीम के सदस्य सीमा से मिली जानकारी और अपने अनुभव को लिखकर देंगे, जिसके आधार पर संघ रिपोर्ट तैयार करेगा।

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