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जानें 'मिशन 2017' के लिए क्या है RSS का ‘चक्रव्यूह’

Sun, 01 Nov 2015 08:31 AM IST
Updated Sun, 01 Nov 2015 08:31 AM IST
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rss master plan for up assembly election

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने 2017 में होने वाले यूपी विधानसभा चुनाव का मास्टर प्लान (चक्रव्यूह) तैयार कर लिया है। संघ ने इस मास्टर प्लान को धरातल पर उतारने के लिए जिलों में एक अलग टीम गठित की है।

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इस टीम में संघ के प्रचारकों, स्वयंसेवकों और भाजपा के जनप्रतिनिधियों को शामिल किया गया है। चक्रव्यूह की रचना करने वाली टीम की नजर पर सत्तारुढ़ समाजवादी पार्टी की युवा विंग पर है।
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संघ ने अपनी चक्रव्यूह टीम से समाजवादी युवजन सभा, समाजवादी छात्रसभा, मुलायम सिंह यूथ ब्रिगेड और लोहिया वाहिनी की गतिविधियों पर नजर रखने को कहा है। संघ का मानना है कि युवा समाजवादियों की यही टीम पार्टी की रीढ़ है और चुनाव में इनकी सक्रियता से ही पार्टी को बल मिलता है।

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पंचायत चुनाव के जरिए 2017 फतह की कोशिश

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संघ के रणनीतिकारों का मानना है कि 2017 में यूपी को फतह करने के लिए भाजपा को ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में सीटें चाहिए होंगी। इसके लिए अभी से ही तय कार्ययोजना पर काम शुरू करना होगा।

पंचायत चुनाव में पूरी ताकत से उतरने का एलान भी इसी योजना का हिस्सा बताया जा रहा है। पंचायत चुनाव के जरिए पार्टी 2017 के लिए अपनी तैयारियों को परखना चाहती है।

संघ के प्रचारकों का मानना है कि पंचायत चुनाव के परिणामों से संगठन की तैयारी और ताकत का अंदाजा तो लग ही जाएगा, साथ ही आम जनता के बीच मोदी की साख और लोकप्रियता का भी परीक्षण हो जाएगा।

बनारस को बनाया काशी प्रांत का केंद्र

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आरएसएस ने ‘मिशन चक्रव्यूह’ के संचालन के लिए बनारस को काशी प्रांत का केंद्र बनाया है। प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र होने के नाते भी बनारस संघ के लिए काफी महत्वपूर्ण है। यहां की तीन शहरी विधानसभा सीटों (उत्तरी, दक्षिणी और कैंट) पर भाजपा का कब्जा है।

दो सीटें रोहनिया और सेवापुरी पर कभी ‘कमल’ नहीं खिला। संघ चाहता है कि 2017 में वाराणसी संसदीय क्षेत्र की सभी पांचों विधानसभा सीटें भाजपा के पास हों। यही वजह है कि संघ ने बनारस को काशी प्रांत का केंद्र बनाया है।

संघ ने प्रदेश की समाजवादी पार्टी सरकार को घेरने की व्यूह रचना तैयार की है। इस काम में संघ ने अपने केंद्रीय स्तर के दो नेताओं दत्तात्रेय होसबोले और डॉ. कृष्णगोपाल को लगाया है।

उनकी अगुवाई में जिला स्तर पर गठित कमेटी प्रदेश सरकार के खिलाफ आंदोलन के मुद्दों का तलाशेगी और भाजपा नेता इस मुद्दे को डछालकर सपा पर दबाव बनाएंगे। संघ के आंदोलन की रूपरेखा तैयार करने वाली कमेटी में अपने प्रमुख प्रचारकों के साथ ही प्रचार विभाग के प्रमुख स्वयंसेवकों को भी लगाया है। इस कमेटी में संघ के आनुषांगिक संगठनों के पूर्व पदाधिकारियों को भी शामिल किया गया है।

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