'BJP का दलित मोर्चा, RSS के खिलाफ'
आरएसएस के एक वरिष्ठ कार्यकर्ता ने सर संघ चालक मोहन भागवत को पत्र लिखकर भाजपा के दलित मोर्चा को भंग कराने की मांग की है। इस पत्र में उन्होंने कहा है कि जाति पर आधारित भाजपा की ये इकाई संघ के सिद्धातों के खिलाफ है क्योंकि संघ जातिवाद पर भरोसा नहीं करता।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को पत्र लिखने वाले संत प्रकाश जाटव भाजपा के पिछड़े वर्ग शाखा के राष्ट्रीय प्रशिक्षण इंचार्ज रह चुके हैं। डॉ. भागवत को लिख अपने पत्र में संत प्रकाश ने कहा है कि या वे भाजपा के दलित मोर्चा को भंग कराएं या इसका पुर्नगठन कराएं।
इतना ही नहीं उन्होंने इस पत्र के माध्यम से मांग की कि भाजपा दलितों के लिए एक ऐसी इकाई बनाए जिसमें सभी वर्ग के लोगों की भागीदारी हो। खास बात यह भी भाजपा में वर्तमान में दलितों के प्रतिनिधित्व के लिए राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर दलित मोर्चा है। अपने इस पत्र में जाटव ने और कई बातें भी कहीं हैं।
'बांटने की राजनीति है जाति आधारित इकाई'
गाजियाबाद के रहने वाले संत प्रकाश जाटव ने लिखा है कि आरएसएस में जाति पर आधारित काम नहीं होता और ऐसे में आरएसएस की राजनीतिक ईकाई मानी जाने वाली भाजपा में जाति आधारित इकाई होने से पता चलता है कि भाजपा आरएसएस के सिद्धांतों पर अमल नहीं कर रही है।
इतना ही नहीं संत प्रकाश में भाजपा के लिए बांटने की राजनीति जैसे कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया है। मीडिया के सवाल करने पर संत प्रकाश ने कहा कि भाजपा ने 1972 में पिछड़ी जातियों को साथ लेने के लिए हरिजन मोर्चा बनाया था। इसके बाद 1980 में एससी मोर्चा बनाया गया जिसका भी उद्देश्य भाजपा में दलितों के शामिल करना था।
संत प्रकाश ने आगे कहा वर्तमान में भाजपा का दलित मोर्चा केवल राजनीति करने के लिए बना है। उन्होंने कहा कि किसी जाति विशेष के लिए आरक्षण की व्यवस्था करना वोट बैंक की राजनीति से ज्यादा कुछ नहीं है। हालांकि भाजपा के दलित मोर्चा इकाई के राष्ट्रीय इंचार्ज दुष्यंत कुमार गौतम ने संत प्रकाश के आरोपों को खारिज किया है। गौतम ने कहा कि एक वर्ग विशेष के लोगों की आवाज सामने लाने के लिए इस प्रकार की इकाई जरूरी है।