'खाकी निक्कर' की होगी छुट्टी, नए ड्रेस में दिखेंगे संघ कार्यकर्ता
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ताओं का ट्रेडमार्क 'खाकी निक्कर' जल्द ही पुराने दिनों की बात हो सकता है। संघ युवाओं को आकर्षित करने के लिए नए ड्रेस कोड पर विचाार कर रहा है, भविष्य में संघ के कार्यकर्ता 'निक्कर' के बजाय 'फुल पैंट' में दिख सकते हैं।
संघ ने इससे पहले 2010 में अपने ड्रेस कोड में बदलाव किया था। उस समय कैनवस के बेल्ट के स्थान पर चमड़े के बेल्ट को शामिल किया गया था।
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, रांची में पिछले दिनों हुई बैठक में संघ के युवा कार्यकर्ताओं ने नए ड्रोसकोड यानी निक्कर के बजाय फुल पैंट में परेड की। ये प्रदर्शन संगठन के वरिष्ठ सदस्यों के लिए आयोजित की गई थी। बैठक में ड्रेसकोड के मसले पर बातचीत भी हुई।
ये हो सकता है संघ का नय ड्रेसकोड
मार्च में नागपुर में होने वाली संघ की 'अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा' में ड्रेसकोड पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। 'अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा' संघ सबसे बड़ी इकाई है, और सभी फैसले यही लेती है।
इंडियन एक्सप्रेस ने संघ के एक वरिष्ठ प्रचारक के हवाले से बताया कि संरसंघचालक मोहन भागवत और सरकार्यवाह भैय्याजी जोशी, दोनों ही नए ड्रेसकोड के पक्ष में है और उनका मानना है कि समय के साथ बदलाव होते रहना चाहिए। हालांकि संगठन में कई ऐसे भी हैं, जो निक्कर को हटाए जाने के खिलाफ है।
रांची के प्रस्ताव अनुसार टी शर्ट (सफेद के साथ ही अन्य रंगों में भी), काली फुल पैंट, काली टोपी, सफेट कैनवस के जूते और खाकी मोजे संघ का नया ड्रेस कोड हो सकता है। ड्रेस कोड का एक और विकल्प रखा गया है, जिसमें सफेद फुल स्लीव शर्ट, पैंट (खाकी, नेवी ब्लू, ब्लू या ग्रे कलर की), लेदर या रेक्सेन के काले जूते, कैनवस की बेल्ट और काली टोपी शामिल है।