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'छात्रों के आधार पर मिले संस्थानों को अल्पसंख्यक का दर्जा'

Thu, 09 Jul 2015 09:31 AM IST
धीरज कनोजिया/ अमर उजाला, दिल्ली
धीरज कनोजिया/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Thu, 09 Jul 2015 09:31 AM IST
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विवादों में घिरीं केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी के कामकाज को लेकर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के शिक्षक संगठन भारतीय शिक्षण मंडल ने कहा है कि मानव संसाधन विकास मंत्री के कामकाज से सहमत नहीं है मगर कुछ हद तक संतुष्ट है।

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संगठन ने च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम की वकालत की है और साथ ही इसे लागू करने से पहले व्यापक विचार विमर्श करने की बात भी कही है।

संगठन मंत्री मुकुल कानिटकर ने कहा है कि वह मंत्रालय के कई कदमों से सहमत नहीं है मगर संपूर्ण रूप से देखा जाए तो संगठन संतुष्ट है।

छात्रों की संख्या के आधार पर मिले अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा

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कानिटकर ने कहा कि उनका संगठन नई शिक्षा नीति को लेकर अपने सुझाव दे रहा है। इसके तहत आठवीं कक्षा में छात्रों को व्यावाहरक ज्ञान देने के बाद छात्रों को कौशल विकास के लिए प्रशिक्षण संस्थान में प्रवेश कराने पर बल दिया गया है।

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े भारतीय शिक्षण मंडल ने कहा है कि छात्रों की संख्या के आधार पर संस्थानों को अल्पसंख्यक का दर्जा मिलना चाहिए।

शिक्षण मंडल का कहना है कि अभी तक संस्थानों को प्रबंधन मंडल के सदस्यों की संख्या के आधार पर अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा मिल जाता है।

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सुप्रीम कोर्ट करे हस्तक्षेप

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शिक्षण मंडल का कहना है कि इस व्यवस्था को बदलना चाहिए।अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा छात्रों की संख्या के आधार पर करना चाहिए।

शिक्षण मंडल के संगठन मंत्री मुकुल कनिटकर ने कहा कि संस्थान में अगर ज्यादा संख्या में अल्पसंख्यक संस्थान है उसे ही अल्पसंख्यक का दर्जा दिया जाना चाहिए।

इसके लिए संविधान संशोधन लाने की जरूरत है। कनिटकर का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट को इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस संबंध में उनका संगठन कानूनी राय लेने पर भी विचार कर रहा है।

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