संघ को नहीं भाया मोदी का ये प्लान
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मेक इन इंडिया को अमली जामा पहनाकर भारत को मैन्यूफैक्चरिंग हब बनाने की मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी योजना पर संघ की ओर से ही आशंका व्यक्त की जा रही है। संघ से जुड़े स्वदेशी जागरण मंच ने मेक इन इंडिया के बदले छोटे और मझोले उद्योगों को खड़ा कर इसे मेड बाय इंडिया का स्वरूप देने का प्रस्ताव रखा है।
मंच का मानना है कि मेक इन इंडिया योजना के जरिए एफडीआई आधारित विदेशी पूंजी के वर्चस्व का खतरा है। इसलिए देशी छोटे मझोले स्वदेशी उद्योगों को तरजीह देकर सरकार को मेड बाय इंडिया पर जोर देना चाहिए। स्वदेशी की आवाज बुलंद करने वाले संघ का भी यह मानना है कि मेड बाय इंडिया दुनिया के बाजारों में ब्रांड इंडिया को स्थापित करेगा।
बेशक स्वदेशी मंच को मोदी सरकार की मैन्यूफैक्चरिंग हब बनाने के लिए उठाए गए कदमों और नीयत पर शक नहीं है। मगर उसे आशंका है कि व्यापक पैमाने पर एफडीआई से देश की अर्थव्यवस्था पर विदेशी पूंजी का वर्चस्व कायम हो जाएगा। शायद इसीलिए बीते हफ्ते स्वदेशी जागरण मंच की छतरी तले जयपुर में हुए स्वदेशी संगम के दो दिनी सम्मेलन के बाद घोषणा पत्र जारी कर मेक इन इंडिया की जगह मेड बाय इंडिया पर जोर देने की अपील की गई है।
छोटे-मझोले उद्योग, किसान और खुदरा व्यापारियों के सौ से अधिक संगठनों के 800 से ज्यादा प्रतिनिधियों ने दो दिनों तक विचार मंथन किया। घोषणा पत्र में विदेशी निवेश के रूट, इसके लिए टैक्स हैवन देशों के रास्ते निवेश और कर चोरी जैसे तथ्यों की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा गया कि वैश्विक राजनीति में उथल पुथल से एफडीआई आधारित अर्थव्यवस्था को व्यापक नुकसान उठाना पड़ता है।
ब्रांड इंडिया को मिलेगी मजबूती
स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय सह संयोजक अश्विनी महाजन ने कहा कि हमारा मत मेक इन इंडिया के बदले मेड बाय इंडिया पर जोर देकर अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रांड इंडिया को मजबूती देने की है। उन्होंने कहा कि एफडीआई की पैरोकारी करने वाले देशों में ही विदेशी निवेश आधारित अर्थव्यवस्था सफल नहीं हो पाई है। इसलिए हमें केवल चीन की तरह केवल उत्पादन हब नहीं बल्कि ब्रांड इंडिया के साथ उत्पादन हब बनने की जरूरत है।
ब्रांड इंडिया को स्थापित क्यों नहीं कर सकते
महाजन ने तर्क दिया कि जब हम खुद सैटेलाइट पीएसएलवी बना सकते हैं, दूसरे देशों को इस क्षेत्र में मदद कर सकते हैं। मंगल ग्रह पर यान भेज सकते हैं तब हम छोटे और मझोले उद्योगों द्वारा निर्मित उत्पाद को ब्रांड इंडिया के तौर पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थापित क्यों नहीं कर सकते।
स्वदेशी संगम के घोषणा पत्र में कहा गया है कि विदेशी निवेश पर आधारित उत्पादन नीति के स्थान पर देश में अनुसंधान और विकास के माध्यम से भारतीय उत्पादों और ब्रांडों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थापित करते हुए मेड बाय इंडिया ध्येय को क्रियान्वित किया जाए।