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आखिरकार लालकृष्ण आडवाणी के सामने झुका संघ
नई दिल्ली/हरीश लखेड़ा
Updated Wed, 23 Jan 2013 12:12 AM IST
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भाजपा के नए अध्यक्ष को लेकर आखिरकार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को लालकृष्ण आडवाणी के सामने झुकना पड़ा। अंतिम समय में नितिन गडकरी की दोबारा ताजपोशी रुकवा कर आडवाणी ने साबित कर दिया है कि वे आज भी भाजपा में सबसे ताकतवर हैं। हालांकि बदले राजनीतिक घटनाक्रम में अब भाजपा में अंदरूनी खींचतान और तेज होने की संभावना है।
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मंगलवार शाम तक तय था कि गडकरी ही दोबारा भाजपा की कमान संभालेंगे, क्योंकि संघ उनके साथ खड़ा था। खुद गडकरी भी अपनी ताजपोशी को लेकर आश्वस्त थे। यही वजह है कि आयकर विभाग के छापों की खबर आने पर गडकरी ने कहा था कि उनके दोबारा चुने जाने से एक दिन पहले सरकार उन्हें बदनाम करना चाहती है।
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हालांकि भाजपा को बाद में इस बयान को संशोधित करना पड़ा। दूसरी ओर, आडवाणी खेमे की ओर से गडकरी को रोकने के लिए अंतिम हथियार के तौर पर यशवंत सिन्हा को मैदान में उतार दिया गया। सिन्हा ने नामांकन पत्र और मतदाता सूची मंगा ली। इसके बाद घटनाक्रम इतनी तेजी से घूमा कि राजनाथ सिंह नए अध्यक्ष के तौर पर उभर आए।
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दरअसल, पूर्ति समूह पर तमाम आरोप लगने के बाद भी संघ अपने चहेते गडकरी की दोबारा ताजपोशी के लिए अड़ा था, लेकिन आडवाणी की दलील थी कि गडकरी पर संदेह की उगंली उठ जाने के बाद उन्हें दोबारा पार्टी की कमान नहीं सौंपनी चाहिए। वह भी तक जब भाजपा यूपीए सरकार के भ्रष्टाचार के मामले उठाती रही है। हालांकि आडवाणी राजनाथ सिंह के पक्ष में भी नहीं थे, लेकिन अंतत: उन्होंने गडकरी की दोबारा ताजपोशी रुकवा दी है।
वैसे संघ पूरी कोशिश में था कि गडकरी की दोबारा ताजपोशी हो जाए। संघ की पहल पर ही गुरुमूर्ति से गडकरी पर लगे आरोपों की जांच की और उन्हें क्लीन चिट दे दी गई। इसके बावजूद आडवाणी टस से मस नहीं हुए। उन्होंने पहले सुषमा का नाम चलाया, लेकिन मामला नहीं बना। बहरहाल, गडकरी को रोककर आडवाणी ने संकेत दे दिया है कि आज भी भाजपा में उनकी ही सुनी जाती है।