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कांठ: बवाल के बाद सड़क पर उतरी भाजपा

Mon, 30 Jun 2014 02:50 PM IST
उमेश शर्मा, सुशील भदौरिया/अमर उजाला, मुरादाबाद
उमेश शर्मा, सुशील भदौरिया/अमर उजाला, मुरादाबाद Updated Mon, 30 Jun 2014 02:50 PM IST
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मुरादाबाद के कांठ में पुलिस द्वारा मंदिर के ताले तोड़कर जबरन लाउडस्पीकर उतारने और दलित महिलाओं पर लाठीचार्ज की घटना को मुद्दा बना चुकी भाजपा ने रविवार को केंद्रीय मंत्री डा. संजीव बालियान को मैदान में उतार दिया। टॉप लीडरशिप के निर्देश पर सूरजकुंड वर्कशाप छोड़कर बालियान तीन सांसदों के साथ प्रभावित गांव के लिए निकले, लेकिन प्रशासन ने उन्हें मंडल के बार्डर पर ही रोक लिया।

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केंद्रीय मंत्री और सांसदों को जबरन रोकने पर कार्यकर्ताओं का हुजूम हाईवे पर उतर आया और प्रदेश सरकार के खिलाफ जबरदस्त नारेबाजी की। इससे पहले कांठ जाने की कोशिश कर रहे भाजपा के दो विधायकों समेत नौ नेताओं को पुलिस ने मंडल मुख्यालय पर गिरफ्तार कर लिया।
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उधर, कांठ की घटना के विरोध में रविवार को भी हिंदू संगठनों का गुस्सा सड़कों पर फूंका। भाजयुमो और हिंदू संगठनों ने जगह-जगह मुख्यमंत्री के पुतले फूंके और सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किए। इस बीच कांठ संगीनों के साए में शांत रहा और सभी प्रमुख बाजार बंद रहे।
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कांठ में ऐसे शुरू हुआ हिंदू संगठनों का बवाल

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कांठ के विधायक अनीसुर्रहमान के गांव अकबरपुर चैदरी उर्फ नया गांव में दूसरे वर्ग की शिकायत पर जिला प्रशासन ने तीन दिन पहले मंदिर के ताले तोड़कर लाउडस्पीकर उतार लिया था।

विरोध पर दलित महिलाओं की बेरहमी से पिटाई की। चार महिलाओं समेत आठ लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार भी कर लिया था। जिसके विरोध में हिंदू संगठनों ने जाम लगाया था और पुलिस के एक्शन से हालात बिगड़े।

कांठ जल उठा था और पुलिस व भीड़ के बीच पथराव फायरिंग और तोड़फोड़ में कई लोग घायल हुए। भाजपा इस मुद्दे पर महापंचायत का ऐलान कर चुकी है।

मंदिर पर दोबारा लाउडस्पीकर लगाने, निर्दोषों पर दर्ज केस खत्म करने और मूर्ति का अनादर करने वाले पुलिस कर्मियों को दंडित करने की मांग कर रही है।

रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में चल रही भाजपा की सूरजकुंड वर्कशाप से केंद्रीय मंत्री डा. संजीव बालियान, मुरादाबाद सांसद कुंवर सर्वेश सिंह, संभल सांसद एडवोकेट सत्यपाल सिंह सैनी, डा. यशवंत सिंह को मौके पर भेजा था।

जिन्हें पहले ब्रजघाट में रोका गया फिर गजरौला में सड़क पर टैंकर लगाकर पुलिस ने मंत्री के काफिले को आगे बढ़ने से रोक दिया। पौन घंटे तक मंत्री और सांसद कार्यकर्ताओं के हुजूम के साथ सड़क पर खड़े रहे।

पुलिस की आंखों में धूल झोंक पहुंचे विधायक

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मुरादाबाद के डीएम और एसएसपी ने मंत्री से जांच के लिए दो दिन की मोहलत मांगी। मंदिर पर दोबारा लाउडस्पीकर लगाने, कथित रूप से बिना अनुमति बन रही मस्जिद के निर्माण पर रोक और जेल भेजे लोगों को रिहा करने की हिदायत के साथ मंत्री सांसदों समेत देर रात दिल्ली लौट गए।

इससे पहले प्रदेश अध्यक्ष के नेतृत्व पर नूरपुर विधायक लोकेंद्र चौहान पुलिस की आंखों में धूल झोंककर अकबरपुर चैदरी पहुंचे और पीड़ित पक्ष से हाल जाना।

बाद में जिला प्रशासन ने लोकेंद्र चौहान और कांठ जाने की कोशिश कर रहे मेरठ पश्चिम के विधायक रवींद्र भड़ाना, क्षेत्रीय अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह, महानगर अध्यक्ष रितेश गुप्ता समेत नौ नेताओं को गिरफ्तार कर लिया जिन्हें बाद में रिहा कर दिया गया।

कांठ में हो रहे बलवे के पीछे संघ की रणनीति

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मुरादाबाद के कांठ प्रकरण में भाजपा की तेजी सामान्य नहीं है। पार्टी के लिए ये मुद्दा महज किसी मंदिर से लाउडस्पीकर उतारने का भी नहीं है। एक स्थानीय मामले में भाजपा की टॉप लीडरशिप यूं ही दिलचस्पी नहीं ले रही। बल्कि ये आंदोलन एक सोची समझी रणनीति की उपज है। इस आंदोलन को पर्दे के पीछे से संघ ऑपरेट कर रहा है।

कांठ बवाल के बहाने संघ दलितों को बाकी हिंदू समाज के साथ जोड़ने की चाहत रखता है। संघ की बेचैनी का आलम ये है कि इस मुद्दे पर उसने अपने शीर्ष प्रचारकों को मुरादाबाद भेजा और आधी रात संघ दफ्तर पर दो घंटे की मैराथन मीटिंग भी चली।

लोकसभा चुनावों से भी बहुत पहले से ये संघ के टॉप एजेंडे में शामिल है कि दलितों को मूल हिंदू धारा के साथ जोड़कर उन्हें वापस लाया जाए। इसी के तहत आरएसएस ने लोकसभा चुनावों में दलितों को भाजपा के पक्ष में खड़ा करने का काम भाजपा नेताओं के बजाए मंझे हुए संघ कमांडरों को सौंपा था। जिसमें संघ कामयाब भी रहा। अब संघ की कोशिश है कि दलितों के इस जुड़ाव को बनाए रखा जाए।

हिंदू जागरण मंच और भाजपा का इस्तेमाल

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इसी के तहत कांठ में दलित महिलाओं पर लाठीचार्ज हुआ तो संघ ने अपनी विंग हिंदू जागरण मंच को आगे कर दो प्रचारकों को कांठ आंदोलन को लीड करने के लिए उतार दिया था। जिन्होंने जाम के दौरान नेतृत्व किया और गिरफ्तार होने के बाद अब जेल में हैं। मुद्दा गरम हुआ संघ ने भाजपा को आगे किया। संघ की रणनीति के तहत ही भाजपा ने महापंचायत का ऐलान किया। विधायक आए, प्रदर्शन हुए और गिरफ्तारियां हुईं।

भाजपा के राष्ट्रीय विभाग संगठन महामंत्री रामलाल पूरे मामले पर नजर रखे हैं। उनके दखल के बाद ही पार्टी के टॉप नेताओं ने सूरजकुंड में चल रही अति महत्वपूर्ण कार्यशाला से मुक्त कर केंद्रीय मंत्री डा. संजीव बालियान और तीन सांसदों को कांठ रवाना किया।

इससे पहले संघ के प्रांत प्रचारक आलोक शनिवार को रात करीब एक बजे मुरादाबाद पहुंचे और संघ कार्यालय पर प्रचारकों व भाजपा नेताओं के साथ लंबी मीटिंग की। परिस्थितियां साफ बयां कर रही हैं कि इस मुद्दे से भाजपा कदम पीछे खींचने वाली नहीं है।

दलित परिवारों ने छोड़ दिया गांव

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यूपी की सियासत का केंद्र बने अकबरपुर चैदरी गांव से दलित परिवार पलायन करने लगे हैं। इस गांव में दस से भी ज्यादा मकानों पर ताले लगे हैं। न तो इनकी फसलों को कोई देखने वाला है और न ही पशुओं को। खौफ पुलिस की उस कार्रवाई का है जिसकी स्क्रिप्ट सियासत के दबाव में लिखी जा रही है।

पीस पार्टी के विधायक अनीसुर्रहमान का गांव है अकबरपुर चैदरी। दिल्ली से लखनऊ तक इस गांव की गूंज मची है। भाजपा इसे मुद्दा बनाकर आंदोलन का ऐलान कर चुकी है। वहीं बसपा नेता भी मैदान में उतर गए। बसपा सुप्रीमो के आदेश पर रविवार को बसपाई गांव जाने के लिए निकले लेकिन उन्हें रास्ते में ही रोक दिया गया। दरअसल बसपाई दलित परिवारों का हाल जानने जा रहे थे। बताया जा रहा है कि इस गांव के तमाम दलित परिवार घर छोड़कर अपनी रिश्तेदारियों में चले गए हैं। जबकि कुछ जाने की तैयारी में है। इन लोगों को पुलिस का खौफ सता रहा है।

बृहस्पतिवार को जब अकबरपुर चैदरी गांव के मंदिर पर लगे लाउडस्पीकर को उतारा जा रहा था तो इन परिवार के लोगों ने विरोध किया था। पुलिस की लाठीचार्ज में महिलाएं भी घायल हो गईं थीं। पुलिस ने चार महिलाओं समेत आठ लोगों पर कार्रवाई की। ग्रामीणों को डर है कि पुलिस कुछ दूसरे लोगों पर भी कार्रवाई कर सकती है। कई ग्रामीणों ने बताया कि अभी कई परिवार पलायन करने की तैयारी में हैं। क्योंकि कार्रवाई एकतरफा हुई है। ग्रामीणों के दिलों में खौफ बैठ गया है। इधर पुलिस प्रशासन ने पलायन रोकने के लिए अभी तक कोई भी प्रयास नहीं किया है।

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