काशी में धर्मांतरणः ग्रामीणों ने कहा, 'हम कभी ईसाई थे ही नहीं'
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वाराणसी में जिन ग्रामीणों पर धर्मांतरण करने का आरोप लग रह था उन्होंने कहा है कि वे कभी ईसाई थे ही नहीं। उन्होंने धर्म नहीं बदला। वे हिंदू हैं और हिंदू ही रहेंगे। पुलिस ने इलाके में किसी का भी धर्मांतरण कराए जाने से इनकार किया।
टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, पुलिस ने कथित घर वापसी अभियान के एक आयोजक चंद्रमा बिंद को शनिवार को हिरासत में ले लिया। बिंद के दो अन्य सहयोगी मुधबन यादव और शिवबचन गुप्ता फरार हैं।
उल्लेखनीय है कि शनिवार को धर्म जागरण समन्वय समिति नाम एक संगठन ने विज्ञप्ति जारी कर दावा किया था कि वाराणसी के हरहुआ ब्लॉक के चार गांवों में 38 परिवारों को 315 सदस्यों को एक आयोजन में ईसाई से हिंदू बनाया गया।
औसानपुर में ग्राम देवता पूजन समिति (डीह बाबा) के संयोजक चंद्रमा बिंद के नेतृत्व में धर्मांतरण अभियान का आयोजन किया गया था, जिसे 'घर वापसी' नाम दिया गया। कार्यक्रम में गांव के ही पुरोहित धीरज चौबे ओर नागेश चौबे ने ग्रामीणों का कथित पवित्रीकरण किया।
चंद्रमा बिंद के नेतृत्व में किया गया था धर्म परिवर्तन
हालांकि रविवार को बड़ागांव के पुलिस क्षेत्राधिकारी संतोष मिश्रा ने लोगों का बयान लिया तो उन्होंने कहा कि वे कभी ईसाई बने ही नहीं थे। पुलिस ने कहा कि चंद्रमा बिंद और मधुबन यादव ने माहौल बिगाड़ने की साजिश की है और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस का दावा है कि जिस गांव के लोगों के धर्म परिवर्तन की बात सामने आई है, उस गांव में कोई ईसाई नहीं है। पुलिस के मुताबिक औसानपुर में नौ अक्तूबर को ग्राम देवता पूजन समिति (डीह बाबा) के संयोजक चंद्रमा बिंद के नेतृत्व में भोज का आयोजन किया गया था।
इस मौके पर हुए हवन पूजन में औसानपुर, करोमा, रामेश्वर, गोकुलपुर, गहरवारपुर के 500 से अधिक लोग शामिल हुए। कार्यक्रम में शामिल लोगों से एक रजिस्टर पर हस्ताक्षर कराया गया। पुलिस के मुताबिक शनिवार को चंद्रमा सिंह बिंद और मधुबन यादव ने अफवाह फैलाई कि चार गांवों के 38 परिवार के 315 लोग ईसाई धर्म से हिंदू धर्म में शामिल हो गए।
बिंद का दावा, मैंने दिया था बेटे के जन्म का भोज
हालांकि बिंद ने टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में कहा कि उसे चार बेटियों के बाद एक बेटा पैदा हुआ था, जिसके बाद उसने एक धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किया था, जिसमें भोज भी था। उसको लेकर किसी ने प्रचार कर दिया कि ये कार्यक्रम उन लोगों को धर्मांतरण कराने के लिए किया गया जो ईसाई बन चुके हैं।
वहीं ग्राम प्रधान बांकेलाल कन्नौजिया का कहना है कि गांव के लोगों को अंधकार में रखकर पूजा-पाठ कराने के बाद धर्म परिवर्तन का दावा किया गया। बड़ागांव के पुलिस क्षेत्राधिकारी संतोष मिश्रा ने बताया कि संबंधित गांव और आसपास के गांवों में एक भी ईसाई परिवार नहीं है।
टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, गांव वालों ने बताया कि जिन लोगों पर धर्मातरण का आरोप लग रहा है, वे आम तौर पर एक चर्च में जाते थे। उल्लेखनीय है कि वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है।