पूर्व जज करेंगे रोहित वेमुला आत्महत्या मामले की जांच
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
केंद्र सरकार ने दलित छात्र रोहित वेमुला के आत्महत्या मामले की जांच इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश अशोक कुमार रूपनवाल को सौंपी है। वह अपनी रिपोर्ट तीन महीने में सौंपेंगे। उधर हैदराबाद विश्वविद्यालय के तीन शिक्षकों ने छात्रों के समर्थन में बृहस्पतिवार को एक दिन की भूख हड़ताल की।
शिक्षकों का कहना था कि शैक्षणिक और प्रशासनिक गतिविधियों को बहाल करने के लिए कुलपति अप्पा राव तथा इंचार्ज वीसी विपिन श्रीवास्तव को पद से हटाया जाए। उस्मानिया विश्वविद्यालय का एक शिक्षक भी इस प्रदर्शन में शामिल हुआ। मामले के तूल पकड़ने के बाद मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने एक फैक्ट फाइंडिंग कमेटी को विश्वविद्यालय भेजा था।
इसी समिति की सिफारिश पर एक सदस्यीय न्यायिक आयोग के गठन का फैसला लिया गया है। मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार जस्टिस (सेवानिवृत्त) अशोक उन परिस्थितियों को देखेंगे और तथ्यों का पता लगाएंगे, जिसकी वजह से रोहित को आत्महत्या जैसा कदम उठाना पड़ा।
प्रतिनिधिमंडल भेजना चाहती है संसदीय समिति
इस बीच हैदराबाद में ज्वाइंट एक्शन कमेटी फॉर सोशल जस्टिस ने आंदोलन को और
तेज करने की चेतावनी दी है। संगठन का कहना है कि मांगें पूरी होने तक
संघर्ष जारी रहेगा।
छात्र राव को वीसी पद से बर्खास्त करने, केंद्रीय
मंत्री स्मृति ईरानी को मंत्रिमंडल से हटाने, रोहित के परिवार को 50 लाख
रुपये मुआवजा और एक सदस्य को नौकरी देने की मांग कर रहे हैं।
छात्रों का
कहना है कि रोहित की मौत के लिए कार्य परिषद की उप समिति के प्रमुख
श्रीवास्तव भी बराबर के जिम्मेदार हैं। इसलिए उनसे इंचार्ज वीसी का पद ले
लेना चाहिए।
अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति कल्याण पर संयुक्त संसदीय समिति ने रोहित मामले पर चिंता जताई है। समिति ने हैदराबाद विश्वविद्यालय और आईआईटी चेन्नई में एक प्रतिनिधिमंडल भेजने का समर्थन किया है। आईआईटी चेन्नई में दलित छात्रों के साथ अन्याय की शिकायतें आई हैं। इस समिति के अध्यक्ष भाजपा के फग्गन सिंह हैं।