{"_id":"5e7a0206-7abb-11e2-8deb-d4ae52bc57c2","slug":"right-to-education-act-does-not-apply-to-nursery-admission","type":"story","status":"publish","title_hn":"नर्सरी दाखिले में स्कूलों की ही चलेगी","category":{"title":"India News Archives","title_hn":"इंडिया न्यूज़ आर्काइव","slug":"india-news-archives"}}
नर्सरी दाखिले में स्कूलों की ही चलेगी
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Wed, 20 Feb 2013 01:04 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि शिक्षा के अधिकार संबंधी कानून (आरटीई) के दायरे में नर्सरी दाखिला नहीं है। इसके दायरे में मात्र 6 से 14 वर्ष के बच्चे ही आते हैं।
विज्ञापन
हालांकि अदालत ने सरकार को आरटीई कानून में संशोधन करके नर्सरी दाखिलों को भी दायरे में लाने पर विचार करने का सुझाव दिया है। अदालत ने कहा कि यदि ऐसा नहीं किया गया तो बच्चों को निःशुल्क व जरूरी शिक्षा के मूल उद्देश्य का कोई मतलब ही नहीं रह जाएगा। शिक्षा संस्थानों को टीचिंग दुकान बनने की इजाजत नहीं दी जा सकती।
विज्ञापन
मुख्य न्यायाधीश डी. मुरुगेसन व न्यायमूर्ति वीके जैन की खंडपीठ ने 33 पृष्ठों के फैसले में केंद्र व दिल्ली सरकार के उस तर्क को स्वीकार कर लिया कि आरटीई कानून के दायरे में नर्सरी के दाखिले नहीं आते। आरटीई की धारा 35 के अनुसार, जनरल कोटे की 75 प्रतिशत सीटों के दाखिलों पर यह कानून लागू नहीं होगा यानी अब निजी स्कूल को अपने दिशा-निर्देशों के तहत दाखिले प्रदान करने की छूट मिल गई है।
विज्ञापन
वहीं, खंडपीठ ने कहा कि आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षित 25 प्रतिशत सीटों के दाखिलों पर कानून लागू माना जाएगा। आरटीई की धारा 2 (सी) में बच्चों की आयु परिभाषित की गई है। इसके तहत 6 से 14 वर्ष के बच्चों को निःशुल्क व जरूरी शिक्षा को मौलिक अधिकार बताया गया है, लेकिन इसमें 6 वर्ष से कम आयु के बच्चे का हवाला नहीं है।
खंडपीठ ने यह फैसला सोशल ज्युरिस्ट नामक स्वयं सेवी संगठन की याचिका का निपटारा करते हुए दिया। याची ने निजी स्कूलों को दाखिलों के लिए खुद दिशा-निर्देश तय करने की छूट संबंधी जारी सरकारी अधिसूचना को चुनौती दी थी।