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मालदार हड़प रहे हैं गरीबों के मकान: कैग

Thu, 29 Nov 2012 10:27 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Thu, 29 Nov 2012 10:27 PM IST
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rich people captured house of poors said cag

सरकार जिन मकानों को शहरी गरीबों के लिए बना रही है, उन्हें भी आर्थिक रूप से सक्षम लोग हड़प कर रहे हैं। शहरों और शहरी गरीबों की बदहाली दूर करने के लिए चलाए जा रहे जवाहरलाल नेहरू अरबन रिन्यूअल मिशन (जेएनएनयूआरएम) के ऑडिट में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने इस तरह की कई गड़बड़ियां पकड़ी हैं।

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बृहस्पतिवार को संसद में पेश कैग की रिपोर्ट के मुताबिक, शहरी मिशन के तहत मंजूर कुल 2,815 प्रोजेक्ट में से मार्च 2011 तक सिर्फ 8.9 फीसदी प्रोजेक्ट ही पूरे हो पाएं हैं। सबसे बुरी स्थिति 1,517 आवासीय परियोजनाओं की है, जिनमें से 22 ही पूरी हो पाई हैं। हैरानी की बात है कि फंड खर्च करने के बजाय 22 राज्य सरकारें मिशन के इस पैसे को बैंकों में डालकर करीब 210 करोड़ रुपये का ब्याज कमा चुकी हैं।
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राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों की भागीदारी में चलाए जा रहे केंद्र सरकार के इस अहम कार्यक्रम का सबसे बुरा हाल उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में है। रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च, 2011 तक यूपी के सात शहरों में जेएनएनयूआरएम का एक भी प्रोजेक्ट पूरा नहीं हुआ था। शहरों के कायापलट के लिए वर्ष 2005 में शुरू हुए इस एक लाख करोड़ रुपये के मिशन को वर्ष 2012 में पूरा होना था। लेकिन 65 शहरों के लिए मंजूर ज्यादातर प्रोजेक्ट केंद्र, राज्यों और स्थानीय निकायों के बीच ऐसे फंसे कि मार्च, 2011 तक सिर्फ 8.9 फीसदी प्रोजेक्ट ही पूरे हुए।
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कैग ने जेएनएनयूआरएम के तहत बनाए जा रहे गरीबों के मकानों में कई धांधलियों का पता लगाया है। कैग के सामने 11 ऐसे मामले आए जहां लाभार्थियों की पहचान में गड़बड़ी हुई। मिशन के तहत शहरी गरीबों के लिए कुल 16 लाख मकान बनने थे, जिनमें से एक चौथाई ही बन पाए। जो बने भी हैं, उनमें से आधे ही गरीबों को सौंपे गए हैं, जिसमें कई तरह की धांधलियां पकड़ी गई हैं।


कैग ने अपने परीक्षण के लिए जिन 216 परियोजनाओं को चुना, उनमें से सिर्फ 11 ही पूरी हो पाई हैं। इसके लिए कैग ने प्लानिंग की कमियों, जमीन न मिलने और लागत बढ़ने को वजह माना है। अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर के 1298 प्रोजेक्टों में से सिर्फ 231 प्रोजेक्ट ही पूरे हो पाए। उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और जम्मू-कश्मीर के शहरों में इंफ्रास्ट्रक्चर के कोई प्रोजेक्ट मार्च 2011 तक पूरा नहीं हुआ। दिल्ली में 28 में से सिर्फ चार प्रोजेक्ट ही पूरे हुए।

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