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इन्होंने दिया ice bucket का भारतीय जबाव

Tue, 26 Aug 2014 12:40 PM IST
Updated Tue, 26 Aug 2014 12:40 PM IST
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rice_bucket_challenge_

पश्चिमी देशों से शुरू हुए 'आइस बकेट चैलेंज' के भारतीय संस्करण में पानी की जगह चावल आ गया है। इसके भारतीय प्रारूप का नाम 'राइस बकेट चैलेंज' है। इसका दिलचस्प पहलू यह है कि इसमें बाल्टी की ज़रूरत भी नहीं है।

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बाल्टी की जगह पर मुट्ठी भर चावल या थाली भर चावल भी हो सकता है। चावल पका हो या कच्चा यह भी कोई मायने नहीं रखता है। इसमें चावल किसी ज़रूरमंद को दिया जाता है।
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'आइस बकेट' को यह चुनौती हैदराबाद स्थित चावल अनुसंधान केंद्र में काम करने वाली 38 वर्षीय मंजुलता कलानिधि ने दी है।


कलानिधि ने बताया, "यह आइस बकेट को भारत का जवाब है। बर्फीले ठंडे पानी को पहले अपने ऊपर डालना और फिर उसका वीडियो बनाकर इंटरनेट पर डालना मुझे बड़ा अजीब लगा। मुझे लगता है कि यह इतना अजीब है कि हम भारतीय इससे जुड़ नहीं पाएंगे।"
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वे कहती हैं, "फ़ेसबुक पर मेरी यह टैगलाइन है कि पानी क्यों बर्बाद करें, जब आपके पास चावल हैं तो।"

इस मुहिम में अपने नज़दीकी अस्पताल में चावल या उसके बदले में 100 रुपये दिये जा रहे हैं।

उन्होंने कहा, "आइस बकेट चैलेंज एमिट्रॉफिक लैटरल स्क्लेरॉसिस की वजह से शुरू हुआ। इसने केवल राइस बकेट अभियान को प्रेरित किया है।"

कलानिधि ने सोशल नेटवर्किंग साइट पर एक ज़रूरतमंद व्यक्ति को चावल का पैकेट देते हुए अपनी तस्वीर पोस्ट की है। उनकी यह तस्वीर वायरल हो चुकी है। लगभग 50,000 से अधिक लोगों ने इसे पसंद किया है और सैकड़ों लोगों ने इसपर अपनी प्रतिक्रिया दी है।

परंपरा का हिस्सा

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लेकिन इस मुहिम में चावल ही क्यों? इस पर कलानिधि कहती हैं, "भारत निश्चित तौर पर चावल उत्पादक और उपभोक्ता देश है। चावल दान में देना हमारी परंपरा का हिस्सा है। भले ही हम हिंदू, मुस्लिम या ईसाई हो।"

अपनी भावी योजना के बारे में कलानिधि ने बताया, "बहुत सारे दोस्त और गैर सरकारी संगठन मेरे संपर्क में आए हैं और उन्होंने सलाह दी है कि इसे ऑफ़लाइन मुहिम बनाया जाए। इसे मिशन इंडिया प्रोग्राम के रूप में तब्दील किया जाए।"

सोशल मीडिया पर उनकी निजी स्तर पर शुरू की गई इस मुहिम को उनके बॉस का समर्थन भी हासिल है। संस्था की आधिकारिक वेबसाइट पर भी इसकी चर्चा की गई है।

इसमें कहा गया है, "आप वॉशिंगटन डीसी में रह रहे हों या तंजानिया के किसी गांव में, आप ज़रूरतमंदों को चावल दे सकते हैं।"

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