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फांसी से पहले क्या थी रेहाना की आखिरी तमन्ना, पढ़ें पूरी चिट्ठी

Tue, 28 Oct 2014 06:24 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली Updated Tue, 28 Oct 2014 06:24 PM IST
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reyhaneh jabbari and her letter ?for her mother

ईरान में एक 26 वर्षीय बहादुर महिला को दुनिया की लाख कोशिशों के बावजूद शनिवार को फांसी पर चढ़ा दिया गया। रेहाना जब्बारी नाम की इस महिला का जुर्म यह था कि इसने किशोरावस्था में रेप की कोशिश करने वाले एक शख्स को सबक सिखाते हुए मौत के घाट उतार दिया था।

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इस महिला को फांसी से बचाने के लिए तमाम अभियान चले लेकिन उसे इरान सरकार बचा नहीं सकी।

फांसी पर लटकने के कुछ दिन पहले रेहाना ने अपने साथ हुए अत्याचार और नाइंसाफी की दिल को छूने वाले दास्तान बयां की। जब्बारी का खत अब पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बना हुआ। पढ़िए जब्बारी का पूरा खत-

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'मौत जिंदगी का अंत नहीं होती'

reyhaneh jabbari and her letter ?for her mother

प्रिय शोलेह(जब्बारी की मां), मैं आपसे बहुत प्यार करती हूं। आपने मुझे अपने और पापा के हा‌थ चूमने का मौका क्यों नहीं दिया? मैं अपनी जिंदगी की किताब के आखिरी पेज को पढ़ना चाहती थी लेकिन आपने ऐसा कभी नहीं सोचा की मैं आखिरी पेज को पढ़ूं।

दुनिया ने मुझे 19 साल तक जीने दिया। अब वो मनहूस रात आएगी जिस दिन मैं जान से मार दी जाऊंगी। मेरी लाश को शहर के किसी कोने में फेंक दिया जाएगा। कुछ दिन बाद पुलिस आपके पास आएगी और थाने के एक कोने में पड़ी मेरी लाश को पहचान करने को कहेगी तब आपको पता चलेगा कि मेरा बलात्कार हुआ था।

मेरी लाश को किसी कब्र में दफना दिया जाएगा या जेल के बाहर फेंक दिया जाएगा। लेकिन नसीब में जो बदा हो उसकी शिकायत नहीं करनी चाहिए। आप ठीक से जानती हैं कि मौत जिंदगी का अंत नहीं होती।

जैसा की आपने मुझे ‌सिखाया है कि हर कोई दुनिया में अच्छा-बुरा का अनुभव करने आता और वही जिम्मेदारी उसके कंधों पर होती है।

अंगदान करने की आखिरी अपील

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प्रिय शोलेह,
पहले ही दिन पुलिस के एक अविवाहित एजेंट ने मेरे नाखूनों को लेकर मुझे चोट पहुंचाई क्योंकि इस युग में अब लोगों से खूबसूरती नहीं देखी जाती। बनावट की सुंदरता, विचारों शुभकामनाओं की सुंदरता, खूबसूरत लेखनी, आंखों और नजरिए की सुंदरता और खूबसूरत आवाज की सुंदरता।

मेरी प्रिय मां शोलह, मैं अपने शरीर को मिट्टी में नहीं सड़ने देना चाहती। मैं अपनी आंखों या अपने जवान दिल को धूल में नहीं मिलने देना चा‌हती। मेरी प्रार्थना है कि जैसे ही मुझे फांसी पर लटकाया जाए उसके तुरंत बाद किसी जरूरतमंद को मेरी आंखें, किडनी, दिल, हड्डियां आदि जो भी दूसरे के शरीर में प्रत्यारोपित हो सकें मेरे शरीर से निकाल कर दे ‌दिया जाए।

मेरी प्रिय मां, मैं अपने जीवन से ज्यादा आपको चाहती हूं, इसलिए आपसे गुजारिश है कि मेरी कब्र न बनाई जाए जिसमें कि आप रो-रोकर मुझे याद करें और पूरी‌ जिंदगी दुखी रहें। मेरी दिली इच्छा है कि आप मुझे कब्र देने के बजाए किसी को दान कर दें।

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