क्या बीजेपी में नहीं किया जाता बुजुर्गों का सम्मान?
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टिकट वितरण के घमासान से परेशान बीजेपी अपने बुजुर्ग नेताओं के मनचाही सीट से चुनाव लड़ने के दबाव से भी जूझ रही है।
पार्टी में वरिष्ठ नेताओं को दरकिनार करने को लेकर जारी तनातनी चरम पर पहुंच गई है। शनिवार को जसवंत सिंह के प्रकरण ने साफ कर दिया है बीजेपी में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।
पार्टी के वरिष्ठ नेता खफा हैं लेकिन चुप हैं, ऐसे में विरोधी भी बीजेपी पर निशाना साध रहे हैं।
नाराज लेताओं की लंबी फेहरिस्त
पार्टी अपने पितामह लालकृष्ण आडवाणी को बड़ी मुश्किल से कोपभवन से बाहर लाई थी कि अब एक अन्य बुजुर्ग नेता जसवंत नाराज हो गए हैं।
इससे पहले उत्तर प्रदेश में मुरली मनोहर जोशी, लालजी टंडन, बिहार में गिरिराज सिंह, अश्विनी चौबे, सीपी ठाकुर तो उत्तराखंड में बची सिंह रावत समेत दर्जनों नेता टिकट वितरण पर पार्टी नेतृत्व से खुलेआम नाराजगी जता चुके हैं।
पार्टी का रुख है कड़ा
जसवंत सिंह के दिल में जो दर्द था वो मीडिया के कैमरों के सामने आंसुओं की शक्ल में बाहर निकला। उन्होंने कहा कि पार्टी में जिससे बात करनी थी कर चुका।
साफ है कि उन्होंने पहले पार्टी के भीतर ही बात की थी लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। आडवाणी भी भोपाल से लड़ना चाहते थे गांधी नगर से नहीं लेकिन बीजेपी ने उनकी भी एक ना सुनी।
भोपाल में तो आडवाणी के लिए पोस्टर तक लग गए थे लेकिन उनको शाम होते होते हटा दिया गया।
सूत्रों के मुताबिक पार्टी इस बार कड़े कदम उठाने से नहीं हिचक रही है और ना ही कठोर फैसले लेने से। पार्टी को सत्ता चाहिए चाहिए फिर चाहे उसकी कीमत बुजुर्ग नेताओं को ही क्यों ना उठानी पड़े।
मोदी और राजनाथ की जुगलबंदी
मोदी के लिए मुरली मनोहर जोशी को वाराणसी सीट छोड़नी पड़ी तो लालजी टंडन को राजनाथ के लिए लखनऊ सीट का त्याग करना पड़ा।
जोशी को मोदी का राजनीतिक गुरू भी कहा जाता है। लालजी टंडन भी अटल की विरासत के रखवाले माने जाते रहे हैं। ऐसे में इन दोनों की सीट बदलने का फैसला कठिन काम था।
माना जा रहा है कि पार्टी में इस वक्त केवल राजनाथ और मोदी की ही चल रही है।
मोदी के सामने बीजेपी, संघ बौनी: कांग्रेस
कांग्रेस ने बीजेपी के पीएम उम्मीदवार नरेंद्र मोदी पर सीधा निशाना साधते हुए कहा है कि उनके सामने बीजेपी और संघ बौनी साबित हो रही है।
कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने सवाल उठाया कि जिस तरह बीजेपी के बुजुर्ग नेता मोदी से परेशान हैं, उससे सवाल खड़ा होता है कि क्या उसके प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार बीजेपी और आरएसएस से बड़े हैं।
उन्होंने मोदी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि अगर उनकी इतनी लहर है तो बीजेपी क्यों दलबदल को बढ़ावा दे रही है। वह दलबदलुओं को क्यों टिकट दे रही है।
उन्होंने बीजेपी में सीट बंटवारे को लेकर आडवाणी और जसवंत सिंह की नाराजगी के बारे में टिप्पणी करते हुए कहा कि जब दलबदलुओं को टिकट दी जाएगी तो बीजेपी के विश्वासपात्रों का क्या होगा।