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टैक्स चोरी को लेकर निशाने पर प्राइवेट यूनिवर्सिटी
नई दिल्ली/एजेंसी
Updated Mon, 18 Feb 2013 08:39 PM IST
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करोड़ों रुपये की कर चोरी को लेकर कई निजी विश्वविद्यालयों पर केंद्रीय राजस्व विभाग की नजर है। सेंट्रल एक्साइज इंटेलीजेंस और सेंट्रल इकोनॉमिक इंटेलीजेंस ब्यूरो के महानिदेशक ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
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अधिकारियों को संदेह है कि कई निजी शैक्षणिक संस्थाओं के देश-विदेश में स्थित कैंपस विवि अनुदान आयोग और अन्य सरकारी संस्थाओं द्वारा निर्धारित मानदंडों का उल्लंघन कर चलाए जा रहे हैं। यूजीसी रेगुलेशन के क्लॉज 3.3 के अनुसार स्टेट एक्ट के अंतर्गत स्थापित निजी विश्वविद्यालय राज्य की सीमा के भीतर ही काम करने के लिए बाध्य होते हैं।
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हालांकि विशेष परिस्थितियों में विवि को स्थापना के पांच साल बाद राज्य के बाहर कैंपस खोलने की अनुमति दी जा सकती है, जबकि देखने में आ रहा है कि कई निजी विवि नियमों का उल्लंघन कर देश के अन्य हिस्सों और यहां तक कि विदेश में भी कैंपस खोल रहे हैं। इसे देखते हुए केंद्रीय राजस्व विभाग ने फील्ड सर्वे कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
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जांच से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि हम इस मामले को लेकर लगातार यूजीसी के संपर्क में हैं। मौजूदा प्रावधानों के अनुसार कोई भी इंस्टीट्यूट या संस्थान जो किसी भी तरह का सर्टिफिकेट, डिप्लोमा, डिग्री या कोई भी कानूनी मान्यताप्राप्त शैक्षणिक सर्टिफिकेट प्रदान करता है, वह सर्विस टैक्स देने की बाध्यता से मुक्त होता है। वहीं ऑफ-कैंपस स्टडी सेंटर जो यूजीसी से संबद्ध नहीं होंगे, उन्हें अपनी आय का 12.36 प्रतिशत हिस्सा सर्विस टैक्स के रूप में देना होगा।