फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   results of bihar will change modi?

बिहार का नतीजा क्या नरेंद्र मोदी को बदल देगा ?

Fri, 06 Nov 2015 05:52 PM IST
Updated Fri, 06 Nov 2015 05:52 PM IST
विज्ञापन
results of bihar will change modi?

बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे आठ नवंबर को घोषित होंगे। इन चुनावों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की साख का पैमाना माना जा रहा है।इन चुनावों में भाजपा की जीत हुई तो मोदी की कार्यशैली किस तरह बदलेगी और यदि भाजपा को शिकस्त झेलनी पडी तो पार्टी में उनका रूतबा कैसा होगा।

विज्ञापन


बिहार में अगर भाजपा जीती तो राजनीति पर ये असर पडेगा कि देश की राजनीति एकतरफा हो जाएगी। मोदी की राजनीतिक शक्ति और ज्यादा बढ जाएगी।ये अलग बात है कि मोदी इस शक्ति का इस्तेमाल किस तरह से करना चाहेंगे। अपने काम को और लोकतांत्रिक बनाने में करेंगे या कुछ और।
विज्ञापन


राजनीति का स्वरूप इस मायने में अलग होगा कि मोदी की भाजपा पर, एनडीए पर और संघ पर पकड और मजबूत हो जाएगी।मतलब ये है भाजपा और एनडीए अपने राजनीतिक एजेंडे को और अधिक आत्मविश्वास और शक्ति के साथ लागू करने की स्थिति में होंगे। उनके लिए चुनौतियां लंबे अरसे तक कम हो जाएंगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

तो भाजपा होगी मजबूत!

results of bihar will change modi?

दरअसल, बिहार के चुनाव देश की नब्ज टटोलने के नाम पर हैं कि पिछले डेढ साल में मोदी की स्वीकार्यता कितनी मजबूत हुई है।अगर बिहार में मोदी जीतते हैं तो असम, उत्तर प्रदेश, पंजाब, बंगाल में होने वाले चुनावों पर इसका साफ असर दिखेगा।सबसे बडा असर ये होगा कि भाजपा के पक्ष में नए समीकरण बनेंगे।

एनडीए के घटक दलों पर मोदी की पकड और ज्यादा मजबूत होगी।बिहार के चुनाव देश का राजनीतिक एजेंडा भी तय करने वाला है। आरएसएस का दृष्टिकोण भी इस चुनावों के नतीजों से प्रभावित होगा। उदाहरण के लिए आरक्षण मुद्दे पर मोदी के एजेंडे को संघ को स्वीकार करना पड सकता है।

चुनावों से ठीक पहले संघ ने आरक्षण नीति की समीक्षा करने की मांग की थी, जबकि बाद में मोदी ने चुनावी सभा में कहा था कि उनके जीते जी आरक्षण नहीं हटेगा।अगर बिहार में भाजपा जीती तो ये मोदी और मोदी के नजदीकियों की जीत होगी।मेरा आकलन है कि भाजपा की स्थिति कमजोर नहीं होगी।

जहाँ तक पार्टी की बात है तो इससे भाजपा मजबूत ही होगी।पार्टी को इससे अपने अंदर झांकने का मौका मिलेगा। ये पार्टी को ज्यादा विनम्र और लोकतांत्रिक बनाएगा।पार्टी की देश और दुनिया में स्वीकार्यता को एक नए तरीके से प्रभावित करेगा। वे तमाम लोग जिनके कारण पार्टी की छवि असहिष्णु के तौर पर बन रही है, वो कमजोर होंगे।जब हार के लिए सिरों पर ठीकरे फोडने वालों की तलाश की जाएगी तो वो भी सामने होंगे।

बंगाल, असम, उडीसा, उत्तर प्रदेश के चुनावों में इसका जबर्दस्त असर देखने को मिलेगा।मोदी के कार्य में परिवर्तन की गुंजाइश बिहार के चुनाव डाल पाएं तो मोदी और उनके नजदीकियों पर दबाव बनेगा।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed