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'प्राइवेट स्कूलों में भी एससी-एसटी को मिले आरक्षण'

Fri, 14 Jun 2013 12:10 AM IST
नई दिल्ली/बृजेश सिंह
नई दिल्ली/बृजेश सिंह Updated Fri, 14 Jun 2013 12:10 AM IST
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reservation should be in private schools for sc st

निजी स्कूलों में अनुसूचित जाति के छात्रों को 15 तथा अनुसूचित जनजाति के छात्रों को 7.5 फीसदी अलग से आरक्षण दिया जाए।

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नेशनल मॉनीटरिंग कमेटी फॉर एजेकुशन (एससी-एसटी) ने मानव संसाधन मंत्रालय को सौंपी गई एक रिपोर्ट में यह सिफारिश की है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि (शिक्षा का अधिकार) आरटीई कानून के तहत सामाजिक व आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के बच्चों के लिए निजी स्कूलों में दी गई 25 प्रतिशत के आरक्षण में से ही एससी एवं एसटी को अलग से आरक्षण उपलब्ध कराने के लिए कानून में संशोधन किया जाए।

बुधवार को मानव संसाधन मंत्री पल्लम राजू की अध्यक्षता में हुई एक बैठक में इस रिपोर्ट पर चर्चा हुई। मॉनीटरिंग कमेटी की पूरी रिपोर्ट आने के बाद सरकार इस पर कुछ कदम उठा सकती है।
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अनुसूचित जाति के शैक्षणिक विकास के लिए गठित टास्क फोर्स ने अपनी अंतरिम रिपोर्ट में कहा है कि निजी स्कूलों में गरीब व पिछड़े वर्ग के बच्चों को प्रवेश के लिए तय कोटे में से अनुसूचित जाति के लिए 8 प्रतिशत तथा जनजाति के बच्चों के लिए 4 फीसदी का न्यूनतम कोटा निर्धारित किया जा सकता है। टास्क फोर्स ने यह सुझाव गैर सहायता प्राप्त निजी स्कूलों संदर्भ में दिया है।
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रिपोर्ट में अनुसूचित जाति व जनजाति के लिए कई अन्य महत्वपूर्ण सिफारिशें भी की गई हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि केंद्र सरकार की ओर से शैक्षिक रूप से पिछड़े इलाकों में खोले जा रहे मॉडल स्कूलों में 75 प्रतिशत सीटें बढ़ाकर ऐसे स्कूलों में स्थानीय स्तर पर एससी एसटी वर्ग के बच्चों को उनकी आबादी के अनुपात में प्रवेश में आरक्षण प्रदान किया जाए।

यही नहीं ऐसे स्कूलों को शहरी आबादी के नजदीक खोला जाए तथा सैनिक स्कूल की तर्ज पर हॉस्टल की भी सुविधा दी जाए।

मॉनीटरिंग कमेटी ने अपनी सिफारिश में भेदभाव को रोकने, अनुसूचित जाति के शिक्षकों की संख्या बढ़ाने के लिए विशेष प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए भी सरकार को विशेष कदम उठाने का सुझाव दिया है।


कमेटी ने अनुसूचित जाति के बच्चों से सरकारी स्कूलों में प्राइमरी से लेकर उच्च शिक्षा तक किसी तरह की फीस नहीं लिए जाने की सिफारिश के साथ ही निजी स्कूलों की फीस भी सरकार की ओर से रिफंड किए जाने का सुझाव दिया है।

साथ ही रिपोर्ट में अनुसूचित जाति के लिए निजी संस्थानों में अधिकतम फीस भी तय किये जाने का सुझाव दिया गया है।

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