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दुनियाभर की संसदों में चाहिए महिला आरक्षण
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 05 Oct 2012 08:47 AM IST
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भारत ही नहीं बल्कि दुनियाभर की संसदों और विधानसभाओं में महिलाओं को आरक्षण की दरकार है। विश्व की 190 संसदों के 274 पीठासीन पदों में से मात्र 13.5 फीसदी पर ही महिलाएं पदासीन हैं, इसलिए दिल्ली में एकजुट विभिन्न देशों की संसदों की महिला स्पीकरों-पीठासीन अधिकारियों ने सभी संसदों व विधानसभाओं में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाने की जरुरत पर जोर दिया। इसके अलावा हर क्षेत्र में महिलाओं को आगे लाने की भी वकालत की गई।
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संसद परिसर में आयोजित इस दो दिवसीय सम्मेलन में यह बात सामने आई कि भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में राजनीति के क्षेत्र में महिलाओं की एक जैसी दयनीय हालत है। दुनिया में 190 संसदों में से 77 में द्विसदनीय व्यवस्था है। सिर्फ 37 संसदों में ही महिलाएं किसी एक सदन की पीठासीन अधिकारी हैं। सभी जगह पुरुषों का वर्चस्व है और महिलाओं को राजनीति में आने के लिए बहुत पापड़ बेलने पड़ते हैं।
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सम्मेलन के बाद मीडिया से रूबरू हुई ऑस्ट्रिया की स्पीकर बारबरा प्रम्मर ने कटाक्ष करते हुए कहा कि संसद में एक महिला के आने का मतलब है, वहां एक पुरुष का कम होना। तंजानिया की स्पीकर एनी कडागा का कहना था कि महिलाएं बच्चों और परिवार को पालने में व्यस्त रह जाती हैं। इसके बावजूद वे राजनीति में आना चाहती हैं। लोकसभा की स्पीकर मीरा कुमार ने कहा कि भारतीय संसद ने महिलाओं के कल्याण के लिए बहुत कानून परित कराए हैं।
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‘महिला संवेदी संसदें’ विषय पर महिला स्पीकरों की यह सातवीं बैठक थी। इसका आयोजन भारतीय संसद व अंतर संसदीय संघ ने मिल कर किया। अंतर संसदीय संघ की स्थापना 1889 में हुई थी। इस सम्मेलन में महिला-पुरुष समानता से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर विचार विमर्श किया गया। बुलगारिया, बोत्सवाना, गैबोन, लात्विया, आइसलैंड, तुर्कमेनिस्तान, तंजानिया, युगांडा, जिम्बांबे समेत विभिन्न देशों की संसदों के पीठासीन अधिकारी व प्रतिनिधि इसमें शामिल हुए।