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पीएम के निर्देशों की अनदेखी पर कर्नाटक को फटकार
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Sat, 29 Sep 2012 01:26 AM IST
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प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाले कावेरी नदी प्राधिकरण (सीआरए) के निर्देश की अनदेखी पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कर्नाटक सरकार को कड़ी फटकार लगाई। सीआरए ने तमिलनाडु के लिए 9000 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश कर्नाटक को दिया था, लेकिन निर्देश का पालन करने में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार असफल रही।
जस्टिस डीके जैन व जस्टिस मदन लोकुर की पीठ ने चेतावनी देते हुए कर्नाटक से कहा कि यदि सीआरए के निर्देश का पालन करने में राज्य सरकार असफल रहती है तो अदालत आदेश जारी करेगी। सर्वोच्च अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाले प्राधिकरण सीआरए ने यह आदेश जारी किया था। इसके बावजूद राज्य सरकार ने उसका पालन नहीं किया। पीठ ने कर्नाटक सरकार की ओर से पेश हुए अधिवक्ता से पूछा कि आप निर्देशों का पालन करेंगे या अदालत आदेश जारी करे।
सर्वोच्च अदालत ने 9000 क्यूसेक पानी छोड़े जाने के मसले पर तय हुए समझौता फार्मूला की बिगड़ती स्थिति को लेकर राज्य सरकार से एक सप्ताह में जवाब देने का आदेश दिया। यह व्यवस्था 20 सितंबर से 15 अक्टूबर तक पानी छोड़े जाने को लेकर था। वहीं तमिलनाडु की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता सीएस वैद्यनाथन ने तर्क दिया कि शीर्षस्थ अदालत केंद्र सरकार को राज्य के हितों के संरक्षण के लिए अनुच्छेद 355 के तहत आदेश जारी कर सकती है।
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उन्होंने कहा कि अदालत कर्नाटक में सीआरए के आदेश का अनुपालन सुनिश्चित कराने के लिए सेना को जिम्मेदारी सौंप सकती है, क्योंकि अनुच्छेद 355 के तहत केंद्र सरकार का यह कर्तव्य है कि राज्यों के हितों का बाहरी और अंदरूनी परेशानियों से संरक्षण करे और राज्य में संविधान के प्रावधानों के मुताबिक कार्य को सुनिश्चित कराए।
गौरतलब है कि 10 सितंबर को कर्नाटक ने 10 हजार क्यूसेक पानी कावेरी नदी से 20 सितंबर तक तमिलनाडु को देने पर सहमति जतायी थी। तब अदालत ने तमिलनाडु के आवेदन पर कर्नाटक को अतिरिक्त पानी छोड़ने को कहा था जिस पर 20 सितंबर तक की सहमति थी। इसके बाद सीआरए को निर्देश जारी किए, लेकिन कर्नाटक न उसके निर्देशों को अनदेखा कर दिया।
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जस्टिस डीके जैन व जस्टिस मदन लोकुर की पीठ ने चेतावनी देते हुए कर्नाटक से कहा कि यदि सीआरए के निर्देश का पालन करने में राज्य सरकार असफल रहती है तो अदालत आदेश जारी करेगी। सर्वोच्च अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाले प्राधिकरण सीआरए ने यह आदेश जारी किया था। इसके बावजूद राज्य सरकार ने उसका पालन नहीं किया। पीठ ने कर्नाटक सरकार की ओर से पेश हुए अधिवक्ता से पूछा कि आप निर्देशों का पालन करेंगे या अदालत आदेश जारी करे।
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सर्वोच्च अदालत ने 9000 क्यूसेक पानी छोड़े जाने के मसले पर तय हुए समझौता फार्मूला की बिगड़ती स्थिति को लेकर राज्य सरकार से एक सप्ताह में जवाब देने का आदेश दिया। यह व्यवस्था 20 सितंबर से 15 अक्टूबर तक पानी छोड़े जाने को लेकर था। वहीं तमिलनाडु की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता सीएस वैद्यनाथन ने तर्क दिया कि शीर्षस्थ अदालत केंद्र सरकार को राज्य के हितों के संरक्षण के लिए अनुच्छेद 355 के तहत आदेश जारी कर सकती है।
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उन्होंने कहा कि अदालत कर्नाटक में सीआरए के आदेश का अनुपालन सुनिश्चित कराने के लिए सेना को जिम्मेदारी सौंप सकती है, क्योंकि अनुच्छेद 355 के तहत केंद्र सरकार का यह कर्तव्य है कि राज्यों के हितों का बाहरी और अंदरूनी परेशानियों से संरक्षण करे और राज्य में संविधान के प्रावधानों के मुताबिक कार्य को सुनिश्चित कराए।
गौरतलब है कि 10 सितंबर को कर्नाटक ने 10 हजार क्यूसेक पानी कावेरी नदी से 20 सितंबर तक तमिलनाडु को देने पर सहमति जतायी थी। तब अदालत ने तमिलनाडु के आवेदन पर कर्नाटक को अतिरिक्त पानी छोड़ने को कहा था जिस पर 20 सितंबर तक की सहमति थी। इसके बाद सीआरए को निर्देश जारी किए, लेकिन कर्नाटक न उसके निर्देशों को अनदेखा कर दिया।