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खाद्य सुरक्षा बिल पर स्थायी समिति की रिपोर्ट अगले हफ्ते

Sun, 16 Dec 2012 11:51 AM IST
नई दिल्ली/विजय गुप्ता
नई दिल्ली/विजय गुप्ता Updated Sun, 16 Dec 2012 11:51 AM IST
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report of the standing committee on the food security bill next week

भुखमरी से बचाने वाले खाद्य सुरक्षा विधेयक के लिए गरीबों को अब ज्यादा इंतजार नहीं करना होगा। संसद की स्थायी समिति ने विधेयक पर अपनी रिपोर्ट को अंतिम रूप दे दिया है।

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समिति ने आखिरी बैठक पूरी करने के साथ ही इसे अगले हफ्ते संसद के पटल पर रखने की तैयारी शुरू कर दी है। स्थायी समिति के अध्यक्ष विलास मुत्तमवार ने बताया कि अगले सप्ताह के मध्य में समिति खाद्य सुरक्षा विधेयक से संबंधित रिपोर्ट को लोकसभा में पेश करेगी।
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समिति ने सभी संबंधित मंत्रालयों, सरकारी और गैर सरकारी संगठनों के अलावा सामाजिक संगठनों के सुझाव और सिफारिशों के आधार पर रिपोर्ट तैयार की है।

मुत्तमवार के मुताबिक समिति ने विधेयक के मूल सिद्धांतों में किसी तरह का बदलाव नहीं किया है। सामाजिक संगठनों के सुझावों के अनुसार, कुछ नए प्रावधान शामिल किए हैं।
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समिति ने इस विधेयक को पुख्ता बनाने के लिए कई अहम सुझाव व सिफारिशें की हैं। जिसके तहत गरीबों को दो वक्त की रोटी के लिए अनाज की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके। उन्होंने बताया कि मौजूदा विधेयक पर कई राजनीतिक दलों की आपत्तियां थीं, जिन्हें दूर किया गया है।

वहीं दूसरी ओर खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रो. केवी थॉमस का कहना है कि स्थायी समिति की रिपोर्ट आने के बाद इसे कानून बनाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

समिति के सुझावों के अनुरूप विधेयक का नया मसौदा अगले महीने तैयार कर कैबिनेट की मंजूरी के लिए रखा जाएगा। विधेयक में 67 फीसदी आबादी को खाद्य सुरक्षा के दायरे में लाने का प्रावधान किया गया है।

इस कानून के लागू होने पर सालाना लगभग 650 लाख टन अनाज की जरूरत होगी, जिसके चलते सरकार पर 1.09 से 1.20 लाख करोड़ रुपये की सब्सिडी का बोझ पड़ेगा।

विधेयक में प्रत्येक व्यक्ति को पांच किलो की दर से अनाज की व्यवस्था की गई है। इससे प्रत्येक परिवार को प्रति माह 25 किलो अनाज उपलब्ध हो सकेगा।

खाद्य सुरक्षा विधेयक के तहत गरीबों को चावल तीन रुपये, गेहूं दो रुपये और मोटा अनाज एक रुपये प्रति किलो की दर पर उपलब्ध कराया जाएगा।

विधेयक में बेसहारा महिलाओं, बच्चों, व इन लोगों से जुड़े विशेष समूहों के अलावा प्राकृतिक आपदा के शिकार लोगों के साथ ही भुखमरी से गुजर रहे लोगों को भी खाद्य सुरक्षा उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है।


विधेयक में महिला एवं बाल विकास के तहत गर्भवती महिलाओं को पोषण के लिए छह माह तक 1000 रुपये प्रति माह देने और बच्चों को स्नैक्स देने का भी प्रावधान किया गया है।

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