स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं को लेकर हाथ खींच रहा केंद्र
स्कूलों में सर्व शिक्षा अभियान के तहत ढांचागत बुनियादी सुविधाओं का बजट पिछले पांच साल में घटकर करीब आधा हो गया है। राज्यों में ऐसे बहुत कम स्कूल हैं जो आरटीई के तहत तय मानकों को पूरा करते हैं। भवन, पेयजल, पुस्तकालय, छात्र शिक्षक अनुपात और दोपहर का भोजन जैसे मानकों पर स्कूलों का रिकॉर्ड बिगड़ा हुआ है।
केंद्र का दावा है कि स्कूलों में शौचालय निर्माण का लक्ष्य शत प्रतिशत पूरा हुआ है, मगर गैर सरकारी संगठनों की जमीनी रिपोर्ट और सरकारी आंकड़े इसकी तस्दीक नहीं करते हैं। गैर सरकारी संगठन ‘असर’ का अध्ययन कहता है कि सर्व शिक्षा अभियान के तहत स्कूल की ढांचागत सुविधाओं पर खर्च घटकर 2014-15 में 18 फीसदी रह गया है।
2011-12 में यह 34 फीसदी था। रिपोर्ट के मुताबिक, 2010 में उत्तर प्रदेश के 17.8 फीसदी स्कूलों में पीने का पानी ही नहीं था। 2014 में भी हालत कुछ खास नहीं सुधरे। 14.2 फीसदी स्कूल के बच्चे पेयजल की सुविधा से महरूम रहे।
25 फीसदी स्कूलों में मध्याह्न भोजन की सुविधा
इसी तरह यूपी के गांवों में 78 फीसदी स्कूलों के भीतर ही खेल का मैदान पाया
गया, जबकि चारदीवारी केवल 64 फीसदी स्कूलों में ही मिली। 25 फीसदी स्कूलों
में कोई पुस्तकालय तक नहीं है। यूपी के सिर्फ 19.9 फीसदी स्कूल ही छात्र
और शिक्षक अनुपात में बेहतर थे।
जम्मू कश्मीर के ग्रामीण क्षेत्रों में भी
पिछले पांच साल के भीतर स्कूलों
की पेयजल सुविधा में कोई खास सुधार नहीं हुआ। 2010 में 53.4 तो 2014 में
48.4 फीसदी स्कूलों में पीने का पानी नहीं था। वहीं 2010 में 49.3 फीसदी
स्कूलों में पुस्तकालय नहीं थे तो 2014 में भी 45.6 फीसदी स्कूलों में
पुस्तकालय की सुविधा नहीं थी।
उत्तराखंड में भी 30.7 फीसदी स्कूलों में
पेयजल का अभाव पाया गया। 2014 के सर्वे में हिमाचल प्रदेश ग्रामीण में 81
फीसदी स्कूलों में खेल का मैदान था। पंजाब में भी करीब 20 फीसदी स्कूलों
में पेयजल सुविधा नहीं पाई गई। हरियाणा के ग्रामीण इलाकों में 25 फीसदी
स्कूलों में मध्याह्न भोजन की सुविधा थी।
सिस्टम को बस व्यवस्थित करने की दरकार
इस रिपोर्ट पर ट्रल फॉर पॉलिसी रिसर्च एंड एकांउटबिलिटी इनीशिएटिव की निदेशक यामिनी अय्यर का कहना है कि 2011-12 में शिक्षा पर बहुत ज्यादा आवंटन दिया गया। मगर राज्यों ने खर्च नहीं किया। इसलिग अगला आवंटन नहीं दिया गया। पिछले दो सालों में बजट बहुत ज्यादा काटा गया है। पूरे सिस्टम में पारदर्शिता नहीं है। सिस्टम को बस व्यवस्थित करने की दरकार है।
केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय के मुताबिक, देश के 261,400 सरकारी स्कूलों में शौचालय की सुविधा नहीं थी। सरकार ने स्वच्छ विद्यालय के तहत निजी कॉरपोरेट, सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों और स्वच्छ भारत कोष की मदद से इन सभी स्कूलों में शौचालय की सुविधा मुहैया करा दी है। एक साल में 4,17,796 शौचालय बना दिए गए हैं।