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फाइलों में अटका उत्तराखंड में सड़कों की मरम्मत का पैसा
नई दिल्ली/अजीत सिंह
Updated Fri, 28 Jun 2013 12:12 AM IST
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उत्तराखंड में आए सैलाब में जिन सड़कों के बह जाने से हजारों लोग भूख-प्यास और इलाज के अभाव में दम तोड़ रहे हैं, उनकी मरम्मत का पैसा सरकारी फाइलों से बाहर नहीं निकल पा रहा है। टूटे रास्तों की मरम्मत में जुटे सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) को केंद्र की मदद का इंतजार है।
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सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से 100 करोड़ रुपये की तुरंत सहायता मांगने के बावजूद बीआरओ अभी तक फंड का इंतजार कर रहा है। फंड की किल्लत के चलते कटे रास्तों को जोड़ने में बीआरओ की बेबसी बढ़ती जा रही है।
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उत्तराखंड में बीआरओ के चीफ इंजीनियर केके राजदान ने बताया कि बीआरओ ने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से 100 करोड़ रुपये तुरंत मुहैया कराने की मांग की है। लेकिन मंत्रालय को दो बार पत्र भेजने के बावजूद कोई ठोस जवाब नहीं मिला है।
उन्होंने मंत्रालय से एक सीनियर इंजीनियर भेजकर राजमार्गों को हुए नुकसान का जायजा लेने और उसी हिसाब से फंड रिलीज करने का सुझाव दिया है लेकिन अभी तक मंत्रालय ने इस पर भी कोई अमल नहीं किया है।
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राजदान का कहना है कि फंड में देरी से सड़कों की मरम्मत का काम जारी रखने में बाधा आएगी। वहीं, सड़क परिवहन मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि बीआरओ को 100 करोड़ की सहायता देने के लिए वित्त मंत्रालय से मंजूरी लेने के प्रयास किए जा रहे हैं।
उत्तराखंड के लोक निर्माण विभाग ने भी मंत्रालय से 8 करोड़ रुपये की मदद मांगी है। इसके लिए भी वित्त मंत्रालय से मंजूरी मिलनी बाकी है।
राजमार्गों के लिए चाहिए 1000 करोड़
सैलाब से प्रभावित राजमार्गों को पहले जैसा बनाने के लिए करीब 1000 करोड़ रुपये की तुरंत जरूरत है। करीब 30 किलोमीटर से ज्यादा राजमार्ग पूरी तरह बह गए हैं।