दर्शकों के लिए सेक्स और न्यूडिटी से भी ज्यादा संवेदनशील है धर्म
देश में इन दिनों धर्म, समुदाय को लेकर बवाल मचा है। धर्म-समुदाय को लेकर राजनीति की सीमाओं को लांघा जा रहा। टीवी चैनल इन मुद्दों को लेकर टीआरपी का खेल खेल रहे हैं। तो वहीं भारतीय टीवी दर्शकों के लिए भी अन्य मुद्दों के बजाय धर्म और समुदाय बेहद गंभीर मुद्दा है।
प्रसारण सामग्री शिकायत परिषद (बीसीसीसी) एक स्वतंत्र स्व-नियामक संस्था हैं जो कि आमतौर पर टीवी न्यूज चैनल समेत तमाम मनोरजंन और अन्य चैनलों द्वारा दिखाए जा रहे कार्यक्रम और उनकी सामग्री पर नजर रखती है।
बीसीसीसी ने अभी हाल में अपनी एक सर्वे रिपोर्ट तैयार की है। यह रिपोर्ट टीवी चैनल द्वारा दिखाई जा रही सामग्री को लेकर तैयार की गई है। दरअसल यह रिपोर्ट भारतीय टीवी दर्शकों की शिकायत पर आधारित है।
तमाम टीवी चैनल पर सेक्स, न्यूडिटी और धर्म, समुदाय को लेकर दिखाए जा रहे कंटेट को लेकर दर्शकों ने अपनी शिकायत बीसीसीसी में की है। बीसीसीसी की इस रिपोर्ट में कई चौंकाने वाली बातें सामने आई है।
धर्म को लेकर टीवी चैनल के खिलाफ 4,545 शिकायतें
प्रसारण सामग्री शिकायत परिषद (बीसीसीसी) की सर्वे रिपोर्ट पर गौर किया जाए तो लगता है कि भारत में सेक्स, न्यूडिटी से भी बढ़कर धर्म और समुदाय बेहद संवेदनशील मसला है।
तमाम टीवी चैनल पर दिखाए गए नुकसान-अपराध, विकलांग व्यक्ति और बीमार पशुओं के उपचार और महिलाओं की रूढ़ीवादिता के कंटेट को लेकर बीसीसीसी में 39 फीसदी शिकायत दर्ज हुई हैं।
तो वहीं अकेले 28 फीसदी लोगों ने केवल धर्म और समुदाय को लेकर टीवी पर दिखाए गए कंटेट पर आपत्ति दर्ज की है। यानि कि धर्म, समुदाय मामले में 28 फीसदी शिकायत हुई हैं।
आंकड़े बताते हैं कि विशेषकर धर्म और समुदाय को लेकर 4,545 शिकायतें अब तक हुई। जबकि यह आंकड़ा केवल 3 जुलाई 2014 से 22 अगस्त 2015 तक का है।
महिलाओं ने की ज्यादा शिकायतें
बीसीसीसी की ओर से सूचना एंव प्रसारण मंत्रालय को वर्ष 2012 में भेजी गई रिपोर्ट में केवल 8 फीसदी लोगों ने सेक्स और न्यूडिटी कंटेट को लेकर शिकायत की थी।
यह शिकायत करीब 350 मनोरंजन चैनल के खिलाफ की गई थी। बीसीसीसी ने पाया कि आमतौर पर धर्म और समुदाय को लेकर टीवी दर्शक काफी संवेदनशील हैं।
यह शिकायतें मनोरंजन चैनल पर दिखाए जा रहे धार्मिक चैनल जैसे महाभारत आदि के कंटेट को लेकर की जाती हैं। तो अन्य शिकायतें सेक्स और न्यूडिटी के खिलाफ होती हैं। ज्यादातर शिकायतें महिलाओं के द्वारा की जाती हैं।