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अगले साल से बगैर स्टांप पेपर के हो सकेगी रजिस्ट्री

Tue, 25 Dec 2012 09:51 AM IST
अजीत खरे/ब्यूरो/लखनऊ
अजीत खरे/ब्यूरो/लखनऊ Updated Tue, 25 Dec 2012 09:51 AM IST
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registry would be possible without stamp paper by next year

प्रदेश में अगले साल से ई-स्टांपिंग सिस्टम लागू करने की तैयारी है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की ओर से हरी झंडी मिलने के बाद प्रदेश सरकार ने कई सालों से लटकी ई-स्टांपिंग सिस्टम लागू करने की मुहिम तेज कर दी है। इसके तहत कोई भी व्यक्ति संपत्ति की रजिस्ट्री के लिए स्टांप पेपर लगाने के बजाए सीधे स्टांप शुल्क बैंक में जमा कर सकेगा। इससे स्टांप पेपर का फर्जीवाड़ा व चोरी तो रुकेगी ही, साथ ही बिचौलियों के खेल पर भी रोक लगेगी।

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रजिस्ट्रेशन विभाग ने इससे संबंधित नियमावली का प्रस्ताव तैयार कर लिया है। इसे जल्द कैबिनेट से पास कराए जाने की उम्मीद है। सरकार को अभी नासिक प्रेस से स्टांप पेपर मंगवाने पड़ते हैं। नई व्यवस्था में अलग अलग दर से स्टांप पेपर छपवाने का खर्चा भी बचेगा। प्रदेश के सभी रजिस्ट्री कार्यालयों में कंप्यूटर नेटवर्किंग सिस्टम होने के बाद यह व्यवस्था लागू हो जाएगी। फिलहाल यह व्यवस्था पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर कुछ जिलों में ही लागू करने की तैयारी है।
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...लेकिन छोटे वेंडरों को नहीं होगी दिक्कत
यह व्यवस्था की जा रही है कि दस हजार से ज्यादा के स्टांप पेपर लगाने के लिए ही ई-स्टांपिंग व्यवस्था लागू की जाए। वेंडरों के रोजगार पर असर न पड़े, इसके लिए दस हजार रुपए से कम के स्टांप पेपर बेचने की उन्हें छूट होगी। असल में 100 रुपये के स्टांप पेपर की मांग भी खूब होती है। यह सप्लाई वेंडरों के जरिए ही पूरी हो सकती है।
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जनता को यह होगा फायदा
:- स्टांप पेपर खरीदने व उसकी ढेर सारी प्रतियां संभाल कर रखने के झंझट से जल्द मुक्ति
:- रजिस्ट्री कराने में होगी सुविधा व समय की बचत
:- नकली स्टांप पेपर के बेचने के फर्जीवाड़े पर लग सकेगी लगाम

इस तरह काम करेगा सिस्टम
जिनको जमीन की रजिस्ट्री या एग्रीमेंट के लिए स्टांप पेपर लगाना है वे इसके स्थान पर स्टांप शुल्क सीधे बैंक में जमा कर सकेंगे। उनके अनुरोध पत्र के वैरिफिकेशन के बाद पेमेंट लिया जाएगा और संबंधित विवरण कंप्यूटराइज्ड स्टांप डूयटी एडमिनिस्ट्रेशन सिस्टम में दर्ज होगा। इस पर यूनीक आईडिन्टीफिकेशन नंबर मिलेगा। इस विवरण का प्रिंट आउट ई-स्टांपिंग प्रमाण पत्र के रूप में ग्राहक को मिलेगा। यह प्रमाण पत्र संपत्ति के दस्तावेज के साथ लगा कर निबंधन कार्यालय में जमा करना होगा। निबंधन क्लर्क कंप्यूटर सिस्टम से जान लेगा कि निर्धारित ड्यूटी जमा कर दी गई है और वह रजिस्ट्री कर देगा।


खास बातें
:- इस सिस्टम को लागू करने वाली सेंट्रल रिकार्ड कीपिंग एजेंसी (सीआरए) का चयन खुले टेंडर के आधार पर होगा। इसका चयन पांच साल के लिए होगा।
:- सीआरए को एकत्र स्टांप शुल्क की राशि का कितना प्रतिशत कमीशन के रूप में दिया जाए, यह अभी तय होना है।
:- हर ई-स्टांप प्रमाण पत्र पर एक नया शिनाख्ती क्रमांक अंकित होगा। इसके आधार पर किसी भी ई-प्रमाण पत्र का सत्यापन हो सकेगा। इस क्रमांक पर दूसरा प्रमाण पत्र नहीं जारी हो सकेगा।

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