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जयंती के बाद अब बहुगुणा कांग्रेस की मुसीबत

Sat, 31 Jan 2015 01:14 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून, नई दिल्ली Updated Sat, 31 Jan 2015 01:14 PM IST
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rebel bahuguna in uttarakhand.

अपने विधानसभा क्षेत्र सितारगंज की अनदेखी पर मुख्यमंत्री हरीश रावत पर उन्हीं की तर्ज पर लेटर बम दागने वाले पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा की बमबारी दूसरे दिन भी जारी रही। इस बीच शनिवार को होने वाली कैबिनेट की बैठक एकाएक टाल दी गई जबकि सारे मंत्री राजधानी में जुट चुके थे।

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इसके पीछे सरकारी वजह तो रावत का दिल्ली विधानसभा चुनाव प्रचार करने जाना बताया जा रहा है लेकिन विश्वस्त सूत्रों का कहना है कि इसके पीछे बहुगुणा का वार है। बैठक में बहुगुणा के उठाए गए सवालों पर कोई फैसला नहीं होता तो बहुगुणा कैंप के तेवर व हमले और तीखे हो सकते हैं और अगर कोई फैसला हो गया तो सरकार के झुकने का संदेश जाएगा।
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गौरतलब है कि बहुगुणा ने रावत को लिखे पत्र में चेतावनी दी है कि सितारगंज के लोगों से जुड़ा वर्ग चार और वर्ग 1(ख) की भूमि के नियमितिकरण का मुद्दा अगर जल्द न निपटा तो वे 15 फरवरी को राज्य सरकार केखिलाफ ऊधमसिंह नगर में जन आक्रोश रैली करेंगे।
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बहुगुणा के इस अल्टीमेटम ने रावत कैंप में खलबली पैदा कर दी है। सूत्रों का कहना है कि सरकार के भूमिधरी अधिकार पर जल्द फैसला लेने की भनक लगते ही बहुगुणा सक्रिय हो गए और चिट्ठी लिख मारी। अब मसला श्रेय लूटने का बन पड़ा तो रावत कैंप फैसले का वक्त अपने हिसाब से तय करेगा।

शनिवार की कैबिनेट बैठक टलने के पीछे असल वजह यही बताई जा रही है। अब बैठक की अगली तारीख 8 फरवरी तय की गई है। इसमें सितारगंज का मामला भी आ सकता है।

दिल्ली चुनाव से पहले राहुल सोनिया पर फूटा ‘जयंती बम’

rebel bahuguna in uttarakhand.

दिल्ली चुनाव से पहले कांग्रेस में बगावत के सुर तेज हो गए हैं। कभी सोनिया गांधी की बेहद करीबी रहीं पूर्व पर्यावरण मंत्री जयंती नटराजन ने पार्टी से इस्तीफा देते हुए सीधे गांधी परिवार को ही सवालों के कठघरे में खड़ा कर दिया है। नटराजन ने आरोप लगाया है कि यूपीए सरकार में पर्यावरण मंत्री रहते हुए उन्होंने कांग्रेस हाईकमान के कहने पर ही कई प्रोजेक्ट रोके। कई प्रोजेक्टों को पर्यावरण संबंधी मंजूरी के संबंध में न सिर्फ राहुल बल्कि सोनिया गांधी की ओर से भी दखलंदाजी की जाती थी। नटराजन के इन आरोपों से दिल्ली की राजनीति गरमा गई है। भाजपा ने कांग्रेस पर हमला करते हुए इस मुद्दे को दिल्ली चुनाव में उछालने की तैयारी कर ली है।

नटराजन का आरोप है कि उन्होंने हाईकमान के निर्देशों का पालन किया, लेकिन बदले में केंद्रीय नेतृत्व ने उन्हें उपेक्षा, तिरस्कार और अपमान दिया। इन आरोपों को जाहिर करने के बाद जयंती ने कांग्रेस छोड़ने का ऐलान कर दिया। जयंती ने पिछले साल 5 नवंबर को भी सोनिया गांधी को चिट्ठी लिखी थी। इस चिट्ठी में राहुल पर खासतौर से निशाना साधा गया था। इधर, कांग्रेस ने जयंती पर अवसरवाद से ग्रस्त होने का आरोप लगाया है। पार्टी ने कहा है कि जिन संगीन आरोपों को लेकर जयंती को हटाया गया था, शायद उन आरोपों को लेकर तथ्य अभी मिले हैं, जिनके दबाव में आकर जयंती कांग्रेस पर ऐसे आरोप लगा रही हैं।

कांग्रेस छोड़ने के बाद नटराजन ने पार्टी में लोकतंत्र नहीं होने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उनके इस्तीफे के वक्त पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उनके काम की तारीफ करते हुए चिट्ठी दी थी। मगर राहुल के कार्यालय ने उनकी प्रतिष्ठा धूमिल करने के लिए गलत खबरें फैलाईं। पर्यावरण मंत्री पद छोड़ने के अगले दिन ही फिक्की के एक कार्यक्रम में राहुल ने उन्हें पर्यावरण मंजूरियों के रास्ते में एक रोड़े के रूप में पेश किया। उन्होंने कहा कि वह अभी किसी और पार्टी में जाने पर विचार नहीं कर रही हैं। हालांकि, सियासी चर्चाओं का बाजार गरम है कि जयंती ने कुछ दिन पहले भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से मुलाकात की थी। इसके बाद ही दिल्ली चुनाव अभियान के चरम पर होने के वक्त गांधी परिवार और कांग्रेस पर जयंती ने हमला बोला है।

जयंती ने सफाई दी कि उन्होंने पर्यावरण से जुड़े सभी मुद्दों पर केवल पार्टी लाइन और नियम पुस्तिका का पालन किया। वेदांता और अदाणी के मामले में आदिवासियों और जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए काम किया। दूसरी तरफ कांग्रेस ने कहा है कि जयंती के बिना किसी लोकसभा चुनाव जीते उन्हें चार बार राज्यसभा में भेजा गया। पिछले दस साल में उन्हें कांग्रेस में बड़े पद और सरकार में भी अहम मंत्री पद दिया गया। वह अवसरवाद की राजनीति कर रही हैं। कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि मंत्री पद से हटने के बाद ‘जयंती टैक्स’ जैसा आरोप कांग्रेस का नहीं बल्कि विपक्ष ने लगाया था। शायद इसे लेकर अब कुछ तथ्य सामने आए हैं, जिसके दबाव में जयंती कांग्रेस के खिलाफ बोल रही हैं। सिंघवी का परोक्ष रूप से कहना था कि ‘जयंती टैक्स’ को लेकर खुद सवालों में घिरीं पूर्व पर्यावरण मंत्री को ब्लैकमेल कर उनसे दिल्ली चुनाव के बीच कांग्रेस पर हमला कराया जा रहा है।

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