फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   reality of banaras and narendra modi

साल भर बाद भी मोदी की काशी का क्योटो ख्वाब अधूरा क्यों है?

Sat, 25 Jul 2015 03:13 PM IST
Updated Sat, 25 Jul 2015 03:13 PM IST
विज्ञापन
reality of banaras and narendra modi

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयास से उनके जापानी समकक्ष शिंजो एबे की मौजूदगी में बीते साल अगस्त के आखिरी में बनारस को क्योटो की तरह विकसित करने के लिए समझौता हुआ। इसके बाद लगातार दोनों देशों की ओर से दौरे हुए, बैठकें हुईं लेकिन क्योटो की तरह काशी की सफाई, पेयजल, सीवेज और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए अब तक कोई काम शुरू नहीं हो पाया। यहां की धरोहरों के संरक्षण और पर्यटन विकास की बात भी महज वादों तक ही सीमित रह गई है।

विज्ञापन


इन हालात में काशीवासियों को यह बताने वाला भी कोई नहीं कि जापान की मदद से स्वच्छ, सुंदर और विकसित काशी का सपना आखिरकार कब पूरा होगा। बीते साल 30 अगस्त को भारत और जापान के प्रधानमंत्री के बीच क्योटो की तरह काशी को विकसित करने के लिए समझौता हुआ था। योजना को मूर्त रूप देने के लिए क्योटो के डिप्टी मेयर केनिची ओगासवारा के नेतृत्व में एक जापानी प्रतिनिधिमंडल अक्तूबर 2014 में दो दिनी दौरे पर बनारस आया।
विज्ञापन


निरीक्षण और बैठकों के बाद तय किया गया कि क्योटो काशी के सर्वांगीण विकास के लिए हर तरह की मदद देगा। इस समझौते को आगे बढ़ाने के लिए वर्ष 2015 के मार्च माह में क्योटो विश्वविद्यालय के ग्रेजुएट स्कूल ऑफ ग्लोबल एनवायरमेंटल स्टडीज के डीन प्रो. शिजीओ फूजी की अगुवाई में जापानी राजनायिक, प्राध्यापकों, शोध छात्रों का दल यहां आया। उनके साथ भारतीय विदेश मंत्रालय और शहरी विकास मंत्रालय की टीमें आईं मगर निरीक्षण, बैठक और वादे से बात आगे नहीं बढ़ सकी।
विज्ञापन
विज्ञापन


इसके बाद अप्रैल में महापौर रामगोपाल मोहले की अगुवाई में पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल क्योटो और टोक्यो के दौरे पर गया। लौटते ही जापानी मदद से काशी के विकास के लिए 250 करोड़ रुपये की कार्ययोजना बनी लेकिन अभी उसका कोई भी ठोस रूप काशी के लोगों के सामने नहीं आ पाया है।

समझौते की पुस्तक बनी, काम नहीं हुआ

reality of banaras and narendra modi

क्योटो और काशी के समझौते के बाद क्योटो विश्वविद्यालय के प्रो. राजीब शॉ के मार्गदर्शन में वहां के शोध छात्र रानित चटर्जी ने बनारस के आपदा प्रबंधन पर 90 वार्डों का अध्ययन किया और ‘क्लाइमेट एंड डिजास्टर रेसिलिएंस ऑफ वाराणसी’ नामक रिपोर्ट पेश की गई।

इसमें काशी में आपदा प्रबंधन के सुझाव दिए गए हैं। यह रिपोर्ट आगे के अध्ययन के लिए बीएचयू को भी सौंपी गई लेकिन इसके आधार पर बनारस में थोड़ा भी काम न हो सका।

जायका की असफलता तो नहीं बन रही रोड़ा
जापान इंटरनेशनल को आपरेशन एजेंसी (जायका) की मदद से काशी में सीवेज, कम्युनिटी टॉयलेट व यूरिनल, जलनिकासी, धोबी घाट और गंगा घाटों की मरम्मत के काम चल रहे हैं। इस मद में करोड़ों खर्च हो चुके हैं, मगर कहीं विवाद तो कहीं ठोस कार्ययोजना के अभाव में कोई भी परियोजना मुकाम तक नहीं पहुंच सकी।

नगर निगम के अधिकारी भी दबी जुबान कहते हैं कि शायद क्योटो और काशी समझौते के लिए जापान इन्हीं सब कारणों से ठोस कदम नहीं उठा पा रहा है।

'हम मुकाम तक जरूर पहुंचेंगे'

reality of banaras and narendra modi

रामगोपाल मोहले, महापौर, वाराणसी ने बताया कि काशी और क्योटो का समझौता एक नीतिगत मसला है। काशी में 33 हजार मंदिर हैं तो क्योटो में तीन हजार। दोनों शहरों में काफी असमानता हैं। प्रधानमंत्री ने पहल की है, हम मुकाम तक जरूर पहुंचेंगे। अभी रोडमैप बनाने पर काम चल रहा है, हम किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंच सके हैं।

होने हैं ये काम, मगर अभी शुरुआत तक नहीं
- काशी में कचरा व सीवेज प्रबंधन, जलापूर्ति, स्ट्रीट लाइट और जलनिकासी की मुकम्मल व्यवस्था
- काशी के पक्कामहाल व सारनाथ सहित अन्य हेरिटेज जोन का विकास और पर्यटन को बढ़ावा
- गंगा किनारे रिवर फ्रंट डेवलेपमेंट, पार्किंग, उन्नत ट्रैफिक मैनेजमेंट और जीरो होर्डिंग पालिसी
- गंगा की अविरलता और निर्मलता बरकरार रहने के लिए तकनीकी मदद
- काशी और क्योटो में एक-दूसरे की विशेषताओं वाले मेले व प्रदर्शनी का आयोजन
- क्योटो और और काशी में एक-दूसरे के केंद्र और अंतरभाषायी केंद्र व इंडस्ट्रियल जोन की स्थापना  
- टोक्यो के फैशन रैंप पर काशी के सिल्क व हस्तशिल्प की पहचान
- वाराणसी नगर निगम की कार्यप्रणाली का क्योटो म्युनिसिपैलिटी की तरह विकास और उन्नत सुविधाओं की उपलब्धता

पांच सदस्यीय टीम गई थी जापान
जापान गए पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में से तत्कालीन मंडलायुक्त आरएम श्रीवास्तव रिटायर हो चुके हैं और नगर आयुक्त उमाकांत त्रिपाठी का तबादला हो गया है। वहीं शहरी विकास मंत्रालय के संयुक्त सचिव प्रवीण प्रकाश, महापौर रामगोपाल मोहले और जिलाधिकारी प्रांजल यादव ही अब काशी के लिए उपलब्ध रह गए हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed