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मंटो की याद में: पढ़िए, चार चुनिंदा कहानियां
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
Updated Mon, 11 May 2015 04:15 PM IST
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सआदत हसन मंटो दुनिया के सबसे चर्चित कहानीकारों में से एक हैं और शायद सबसे विवादित भी। उनकी कहानियों की जितनी चर्चा हुई है उतनी शायद किसी और भाषा के कहानीकार की नहीं हुई होगी। उनकी कलम से कहानियां कुछ इस तरह से निकलती हैं, मानों इसके लिए कोई प्रयास किया ही नहीं गया। उन्होंने खुद अपने बारे में कहा है, "मिट्टी के नीचे दफन सआदत हसन मंटो आज भी यह सोचता है कि सबसे बड़ा अफसाना निगार वह खुद है या खुदा।
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पहले वे भारत में रहकर कहानियां लिखते रहे, रेडियो के लिए काम किया और फिल्मों के लिए भी लिखते रहे। विभाजन,दंगों और सांप्रदायिकता पर जो कहानियां मंटो ने लिखीं वे रोंगटे खड़े कर देती हैं। वे सपाट सच लिखते हैं लेकिन मानवीय संवेदना को एक क्षण के लिए भी नजरों से ओझल नहीं होने देते। आज मंटो का जन्म दिन है। प्रस्तुत है उनकी कुछ लघु कहानियां।
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बेखबरी का फायदालबलबी दबी – पिस्तौल से झुंझलाकर गोली बाहर निकली।खिड़की में से बाहर झाँकनेवाला आदमी उसी जगह दोहरा हो गया।लबलबी थोड़ी देर बाद फिर दबी – दूसरी गोली भिनभिनाती हुई बाहर निकली।सड़क पर माशकी की मश्क फटी, वह औंधे मुंह गिरा और उसका लहू मश्क के पानी में हलहोकर बहने लगा।लबलबी तीसरी बार दबी – निशाना चूक गया, गोली एक गीली दीवार में जज्ब हो गई।चौथी गोली एक बूढ़ी औरत की पीठ में लगी, वह चीख भी न सकी और वहीं ढेर हो गई।पांचवी और छठी गोली बेकार गई, कोई हलाक हुआ और न जख्मी।गोलियां चलाने वाला भिन्ना गया।दफ्तन सड़क पर एक छोटा-सा बच्चा दौड़ता हुआ दिखाई दिया।गोलियां चलानेवाले ने पिस्तौल का मुंह उसकी तरफ मोड़ा।उसके साथी ने कहा : “यह क्या करते हो?”गोलियां चलानेवाले ने पूछा : “क्यों?”“गोलियां तो खत्म हो चुकी हैं!”“तुम खामोश रहो।।।।इतने-से बच्चे को क्या मालूम?” करामातलूटा हुआ माल बरामद करने के लिए पुलिस ने छापे मारने शुरु किए।लोग डर के मारे लूटा हुआ माल रात के अंधेरे में बाहर फेंकने लगे,कुछ ऐसे भी थे जिन्होंने अपना माल भी मौका पाकर अपने से अलहदा कर दिया, ताकिकानूनी गिरफ्त से बचे रहें।एक आदमी को बहुत दिक्कत पेश आई। उसके पास शक्कर की दो बोरियाँ थी जो उसनेपंसारी की दूकान से लूटी थीं। एक तो वह जूँ-तूँ रात के अंधेरे में पास वालेकुएं में फेंक आया, लेकिन जब दूसरी उसमें डालने लगा खुद भी साथ चला गया।शोर सुनकर लोग इकट्ठे हो गये। कुएं में रस्सियां डाली गईं।जवान नीचे उतरे और उस आदमी को बाहर निकाल लिया गया।लेकिन वह चंद घंटों के बाद मर गया।दूसरे दिन जब लोगों ने इस्तेमाल के लिए उस कुएं में से पानी निकाला तो वह मीठाथा।उसी रात उस आदमी की कब्र पर दीए जल रहे थे। हलाल और झटका“मैंने उसकी शहरग पर छुरी रखी, हौले-हौले फेरी और उसको हलाल कर दिया।”“यह तुमने क्या किया?”“क्यों?”“इसको हलाल क्यों किया?”"मज़ा आता है इस तरह।"“मज़ा आता है के बच्चे....तुझे झटका करना चाहिए था...इस तरह। ”और हलाल करनेवाले की गर्दन का झटका हो गया। (शहरग - शरीर की सबसे बड़ी शिरा जो हृदय में मिलती है) घाटे का सौदादो दोस्तों ने मिलकर दस-बीस लड़कियों में से एक चुनी और बयालीस रुपये देकर उसेखरीद लिया।रात गुजारकर एक दोस्त ने उस लड़की से पूछा : “तुम्हारा नाम क्या है? ”लड़की ने अपना नाम बताया तो वह भिन्ना गया : “हमसे तो कहा गया था कि तुम दूसरेमजहब की हो!”लड़की ने जवाब दिया : “उसने झूठ बोला था!”यह सुनकर वह दौड़ा-दौड़ा अपने दोस्त के पास गया और कहने लगा : “उस हरामजादे नेहमारे साथ धोखा किया है।।।।।हमारे ही मजहब की लड़की थमा दी.....चलो, वापस करआएं....!”
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