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पाकिस्तान में हमला: भारत में भी रो पड़े लोग!

Wed, 17 Dec 2014 05:03 PM IST
Updated Wed, 17 Dec 2014 05:03 PM IST
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reactions on social media after peshawar

'बच्चे जो स्कूल जा रहे हैं। ‪#‎पेशावरकेबाद‬'

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एक फेसबुक स्टेटस.... बस इतना ही। और इतने में ही सब कुछ। क्योंकि इसके बाद जो अनकहा है वो सबके दिल में है। सबके भीतर।
दुख। आंसू। पीड़ा। और गुस्सा भी। और लोग जाहिर कर रहे हैं। जता रहे हैं। अपनी-अपनी तरह से। अलग-अलग तरीकों से। कई तरह की बहसों में ना पड़ते हुए लोग इस वक्त सिर्फ उस दर्द को महसूस कर रहे हैं और साझा कर रहे हैं जो पेशावर में 132 मासूम बच्चों के मारे जाने से जुड़ा हुआ है।

पेशावर में आर्मी स्कूल में हुए आतंकी हमले के बाद अंकित फ्रांसिस ने अपनी फेसबुक वॉल पर लिखा कि ..'जिस दिन दुनिया से ये सारे धर्म ख़त्म हो जायेंगे तभी ये बच्चे सुकून से बड़े हो पाएंगे'...
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कई कविताएं, गजलें और बेहद भावुक शब्द इस वक्त हर तरफ पढ़ने को मिल रहे हैं। फेसबुक पर सुधीर आजाद ने एक नज्म पेशावर पर लिखी है कि..

जिन तुतलाती हुई आवाज़ों का क़त्ल हुआ है,
उनका मज़हब क्या था?
पाठशाला जिसकी दीवारें लहू से सनी हैं,
किस मज़हब की हैं?
जिन किताबों के बस्तों का रंग बदला है,
किस मज़हब के थे?
उन बच्चों की माओं के ख़ाब का क्या था मज़हब,
उन बच्चों के बापों की ख्वाहिश का मज़हब क्या था?
काश कोई गोली आये कहीं से
और इन सवालों को लगे
काश कोई बम फटे
और उड़ा दे धज्जियाँ इनकी.
सुना है क़ातिलों की शिनाख्त हुई है.
इंसान थे वो....

सारे फर्कों को मिटाते हुए कि यह हमला कहां हुआ है, भारत के लोग इस वक्त एक इंसान के बतौर खुद को इस दुख से खुद को जुड़ा हुआ पा रहे हैं। लोगों ने अपने मन के दुख जाहिर किए हैं और लिखे भी हैं। पढ़िए सोशल मीडिया पर पेशावर की घटना के बाद लिखे गए कुछ शब्द
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पेशावर तक मानव श्रृंखला

reactions on social media after peshawar

विष्णु नारायण ने निदा फाजली की लाइने शेयर करते हुए फेसबुक पर लिखा कि
उठ-उठ के मस्जिदों से नमाज़ी चले गए
दहशतगरों के हाथ में इस्लाम रह गया

एक श्ख्स ने फेसबुक पर पेशावर तक एक वैश्विक मानव शृंखला बनने की बात भी कही।

पेशावर में हमले के बाद पर पोस्ट की गई एक कविता


जो लौट ना सके

reactions on social media after peshawar

पिंकी शाह ने फेसबुक पर लिखा कि रोज देखा करती थी -- उसके घर में लगी फ्रेम में एक खिलखिलाता बच्चे का चेहरा.. आज मुझे उस चेहरे पे खून के छीटे नजर आने लगे..

मनीषा पांडेय ने लौटकर ना आ सके बच्चों पर बेहद मार्मिक शब्द लिखे।




फेसबुक पर पेशावर को लेकर पोस्ट की गई दो और कविताएं






हर तरफ... पेशावर

reactions on social media after peshawar

एक और कविता फेसबुक पर एक व्यक्ति ने साझा की कि..
क्‍या अंतरिक्ष में गिर गयी हैं सारी गेंदें
क्‍या दीमकों ने खा लिया है
सारी रंग बिरंगी किताबों को
क्‍या काले पहाड़ के नीचे दब गये हैं सारे खिलौने
क्‍या किसी भूकंप में ढह गयी हैं
सारे मदरसों की इमारतें
क्‍या सारे मैदान, सारे बगीचे और घरों के आंगन
खत्‍म हो गये हैं एकाएक
तो फिर बचा ही क्‍या है इस दुनिया में?

पढ़िए पेशावर से जुड़ीं कुछ और पोस्ट्स








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