'फाइलें सार्वजनिक कर विवाद खड़ा करना चाहती है भाजपा'
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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के मुताबिक केंद्र सरकार के नेताजी से जुड़ी फाइलें सार्वजनिक करने के पीछे कोई गुप्त मकसद है।
बिहार के मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा नेताओं का स्वतंत्रता संघर्ष में कोई अहम रोल नहीं था, लेकिन भाजपा नीत केंद्र सरकार बोस से जुड़ी फाइलें सार्वजनिक कर स्वतंत्रता संघर्ष के दौरान रही विभिन्न विचारधाराओं को सामने लाकर विवाद खड़ा करना चाहती है।
नीतीश कुमार ने कहा कि जहां महात्मा गांधी ने अहिंसा की विचारधारा को अपनाया था, वहीं नेताजी सुभाष चंद्र बोस उग्र विचारधारा वाले थे। उन्होंने कहा कि इन स्वतंत्रता सेनानियों की विचारधारा भले ही भिन्न थी, लेकिन उनकी लड़ाई देश को स्वतंत्रता दिलाने के एक मकसद के लिए ही थी और अब भाजपा इन्हें सामने लाकर उन्हें राजनीतिक रंग देना चाहती है।
नेताजी के आदर्श ज्यादा प्रासंगिक
वहीं केंद्र सरकार की ओर से नेताजी सुभाष चंद्र बोस से जुड़ी फाइलें सार्वजनिक करने के बाद नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन ने शनिवार को कहा कि इस समय नेताजी की मौत से ज्यादा अहम उनके जीवन पर चर्चा करना है। सेन ने कहा कि मौजूदा परिस्थिति में बोस की समानता व न्याय की धारणा बेहद जरूरी है। देश में इस समय धर्मनिरपेक्षता को एक खराब शब्द माना जाता है। ऐसे में नेताजी के आदर्श और ज्यादा प्रासंगिक हो जाते हैं।
सेन ने शनिवार को अभिनेत्री शर्मिला टैगोर के साथ कोलकाता के नेताजी भवन में आयोजित बोस की जयंती समारोह में शिरकत की। यहां उन्होंने कहा कि देश में इस समय सांप्रदायिकता का एक ऐसा माहौल तैयार किया जा रहा है, जिसमें धर्मनिरपेक्षता को एक खराब शब्द माना जाने लगा है।
समानता व न्याय के बारे में नेताजी का विजन आज ज्यादा प्रासंगिक और सटीक है। एक सवाल के जवाब में उनका कहना था कि नेताजी की गोपनीय फाइलों में छिपे रहस्यों को जानने में उनकी दिलचस्पी तो है, लेकिन उनकी मौत की परिस्थितियों पर चर्चा करने की बजाय उनके जीवन और कार्यों पर विचार करना व उनके विजन का पालन करना ज्यादा महत्वपूर्ण है।
नेता जी के विजन के सहारे चलना होगा
सेन ने कहा कि नेताजी का विजन अब तक अधूरा है और केंद्र में राज करने वाली
सरकारों ने अब तक उसे हकीकत का जामा पहनाने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं
उठाया है।
सेन ने कहा कि वर्तमान मोदी सरकार तो अन्य सरकारों के मुकाबले इस
मामले में और कम काम कर रही है। सेन के मुताबिक हिंदुओं की बहुसंख्यक
आबादी के मन में अल्पसंख्यकों के खिलाफ कोई दुर्भावना नहीं है।
यह सिर्फ एक
राजनीतिक एजेंडा है। नेताजी के विजन से सहारे ही इसका मुकाबला किया जा
सकता है।