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उत्तराखंड में आफत पर रोया 'फेसबुक', फूटा गुस्सा
राजीव पांडे
Updated Thu, 20 Jun 2013 09:11 AM IST
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उत्तराखंड में आई आपदा पर फेसबुक जार-जार रो रहा है। पूरी दुनिया ने प्रकृति के इस कोप का दर्द महसूस किया है। दक्षिण अफ्रीका, नीदरलैंड और ब्राजील जैसे कई देशों के भारतीय प्रवासियों के अलावा वहां के नागरिक भी सोशल मीडिया के जरिये पीड़ा को महसूस कर रहे हैं और प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
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भारत के विभिन्न शहरों में रह रहे उत्तराखंड के प्रवासियों ने भी फेसबुक के जरिये पीड़ितों के लिए मदद जुटानी शुरू की है। इसमें पहाड़ के कई संगठन शामिल हैं। इसके अलावा उत्तराखंड में रह रहे फेसबुकियों की चिंता गुस्सा बनकर नेताओं के खिलाफ नेट पर फूट रही है।
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तस्वीरों में: आसमान से बरसी आफत
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सोमवार सुबह केदारनाथ में आई आपदा का असर फेसबुक पर भी पड़ा है। आमतौर पर कविताओं, दिल को लुभाने वाले फोटो, अपनी तारीफ में लिखी पोस्ट का रुख आपदा की पीड़ा ने मोड़ दिया है।
अधिकांश पोस्ट श्रद्धांजलि, संवेदनाओं और नेताओं के खिलाफ गुस्से से सनी पड़ी हैं। इसके अलावा कुछ प्रत्यक्षदर्शी भी हैं जो आपदा से निकलकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंच गए हैं और अपने डर को इंटरनेट पर साझा कर रहे हैं।
आपदा से बचकर निकले कोलकाता के मनोहर सेन ने लिखा है कि वह केदारनाथ के पास ही किसी जगह पर फंसे हुए थे। इस जगह का नाम उन्हें आज भी पता नहीं। उनके परिवार ने पूरी रात कार के भीतर ही भूखे रहकर बिताई। रातभर पत्थर गिरते रहे, लेकिन उनका परिवार केदार बाबा की कृपा से बच ही गया।
पौड़ी के हरीश बिष्ट ने आपदा के लिए बड़े बांधों को जिम्मेदार बताते हुए नेताओं को कोसा है। हल्द्वानी के चंद्रशेखर करगेती ने लिखा है कि गलत नीतियों का खामियाजा जनता ने भुगता है।
नैनीताल के राजीव लोचन शाह ने लिखा है कि डर के बीच बचकर निकले लोग अब भी नहीं चेते तो अगली बार स्थिति इससे अधिक भयावह होगी। इसके अलावा अधिकांश पोस्टें नेताओं के खिलाफ गुस्से से भरी पड़ी हैं।