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आरोपों के बाद भी गडकरी की ताजपोशी को खतरा नहीं
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 18 Oct 2012 12:57 AM IST
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अरविंद केजरीवाल द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद भाजपा अध्यक्ष के रूप में नितिन गडकरी के दूसरे कार्यकाल पर अटकलों का बाजार गर्म हो गया है। कहा जा रहा है कि उन्हें दूसरी बार अध्यक्ष बनाने से रोकने के लिए भाजपा के अंदर ही एक गुट उनके खिलाफ आरोपों को हवा दे रहा है। लेकिन जानकारों के अनुसार तमाम विवादों के बावजूद गडकरी की दोबारा ताजपोशी को कोई खतरा नहीं है।
देर शाम इन अटकलों को कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने भी यह कह कर हवा दी कि भाजपा का एक खेमा गडकरी को दोबारा अध्यक्ष बनाने के खिलाफ है और वही उनके खिलाफ मोर्चा खोले हुए है। उन्होंने कहा कि गडकरी के खिलाफ केजरीवाल के खुलासे से उन्हें निराशा हुई क्योंकि गडकरी के खिलाफ इससे ज्यादा मामले व सबूत थे।
बहरहाल, गडकरी के समर्थन में सुषमा स्वराज और अरुण जेटली के उतरने से साफ है कि पूरी पार्टी उनके साथ है। गडकरी को दोबारा पार्टी अध्यक्ष बनाए जाने को लेकर केजरीवाल के उठाई उंगली पर सुषमा ने कहा कि कोई राजनीतिक दल अपना अध्यक्ष किसे बनाता है यह पार्टी खुद तय करती है न कि दूसरे लोग।
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इससे साफ है कि गडकरी को लेकर भाजपा बचाव की मुद्रा में आने की बजाए आक्रामक तेवरों के साथ मैदान में उतर चुकी है। वैसे भी गडकरी पर केजरीवाल के लगाए आरोप नए नहीं हैं और वे पहले भी इनका जवाब देते रहे हैं। इसलिए गडकरी को दूसरा कार्यकाल मिलने के रास्ते में कोई रुकावट आती नहीं दिख रही है।
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देर शाम इन अटकलों को कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने भी यह कह कर हवा दी कि भाजपा का एक खेमा गडकरी को दोबारा अध्यक्ष बनाने के खिलाफ है और वही उनके खिलाफ मोर्चा खोले हुए है। उन्होंने कहा कि गडकरी के खिलाफ केजरीवाल के खुलासे से उन्हें निराशा हुई क्योंकि गडकरी के खिलाफ इससे ज्यादा मामले व सबूत थे।
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बहरहाल, गडकरी के समर्थन में सुषमा स्वराज और अरुण जेटली के उतरने से साफ है कि पूरी पार्टी उनके साथ है। गडकरी को दोबारा पार्टी अध्यक्ष बनाए जाने को लेकर केजरीवाल के उठाई उंगली पर सुषमा ने कहा कि कोई राजनीतिक दल अपना अध्यक्ष किसे बनाता है यह पार्टी खुद तय करती है न कि दूसरे लोग।
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इससे साफ है कि गडकरी को लेकर भाजपा बचाव की मुद्रा में आने की बजाए आक्रामक तेवरों के साथ मैदान में उतर चुकी है। वैसे भी गडकरी पर केजरीवाल के लगाए आरोप नए नहीं हैं और वे पहले भी इनका जवाब देते रहे हैं। इसलिए गडकरी को दूसरा कार्यकाल मिलने के रास्ते में कोई रुकावट आती नहीं दिख रही है।