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मोदी सरकार से नाराज RBI कर्मचारी, 19 को हड़ताल

Fri, 13 Nov 2015 01:22 PM IST
Updated Fri, 13 Nov 2015 01:22 PM IST
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RBI employees to go on mass casual leave on November 19

इंडियन फाइनेंसियल कोड के मसौदे की विरोध में 19 नवंबर को रिजर्व बैंक के कर्मचारियों ने सामूहिक अवकाश पर जाने को फैसला किया है।

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आरबीआई कर्मचारियों का ये फैसला बिहार विधानसभा चुनावों में हार और मुल्क में बढ़ रही असहिष्णुता के मुद्दे पर बैकफुट पर खड़ी मोदी सरकार की परेशानियां और बढ़ा सकता है। मोदी सरकार ने फाइंनेशियल कोड का मसौदा जुलाई में जारी किया था, जिसमें कई ऐसे प्रावधान किए गए हैं जिससे रिजर्व बैंक के अधिकारों में कमी आ सकती है।

रिजर्व बैंक के कर्मचारियों का कहना है कि फाइनेंसियल कोड के नाम पर मोदी सरकार रिजर्व बैंक से कई अहम कामकाज छीनना चाहती है। एक विज्ञप्ति में उन्होंने कहा कि कार्य स्थगन का फैसला सरकार के उस कदम के विरोध में है, जिसमें ड्राफ्ट फाइनेंसियल कोड और विधायी सुधार के नाम पर वह रिजर्व बैंक के अधिकार छीनना चाहती है।
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मोदी सरकार और रघुराम राजन में रहे हैं मतभेद

RBI employees to go on mass casual leave on November 19

युनाइटेड फोरम ऑफ आरबीआई ऑफिसर्स एंड इंम्प्लाइज के संयोजक समीर घोष ने बताया कि सरकार ने मौद्रिक नीति समिति का जो प्रस्ताव पेश किया है, उसके जरिए मौद्रिक नीति तय करने का अधिकार अपने हाथ में लेना चाहती है जबकि ये स्पष्ट रूप से ये रिजर्व बैंक के अधिकार क्षेत्र में आता है।

मोदी सरकार ने फाइंने‌शियल कोड का जो मसौदा सामने रखा है, उसमें वित्त मंत्रालय के समक्ष रिजर्व बैंक अधिकारों का पुन‌र्निर्धारण किए जाने का प्रस्ताव दिया गया है। मौद्रिक नीति बनाने के लिए एक मौद्रिक नीति स‌मिति बनाने की बात कही गई। अगर ये मसौदा स्वीकर कर ‌लिया जाता है तो ये समिति ही भविष्य में ब्याज की दरें, मसलन नगद जमा अनुपात, रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट के सबंध में फैसले लेगी, जबकि अब तक ये काम रिजर्व बैंक करता रहा है।

मौद्रिक नीति में बदलाव के मसले पर मौजूदा मोदी सरकार और रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन के बीच अक्सर मतभेद रहे हैं।

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