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22 साल पुराने घोटाले में कांग्रेसी सांसद दोषी करार
अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 19 Sep 2013 08:52 PM IST
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कांग्रेसी सांसद काजी रशीद मसूद को 22 साल पुराने एमबीबीएस सीट घोटाला मामले में दोषी करार दिया गया है। कोर्ट ने मामले में 16 अन्य लोगों को भी दोषी पाया है।
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दोषियों में मसूद के अलावा त्रिपुरा के तत्कालीन स्थानीय आयुक्त समेत चार अधिकारी और 11 छात्र शामिल हैं।
22 साल पुराने घोटाले के समय रशीद मसूद केंद्र में स्वास्थ्य राज्य मंत्री थे। अदालत इन सभी दोषियों को पहली अक्तूबर को सजा सुनाएगी।
दोषियों पर 1990-91 के शैक्षिक सत्र में केंद्रीय पूल से त्रिपुरा के लिए आवंटित सीटों पर दूसरे राज्यों के छात्रों को एमबीबीएस के प्रथम वर्ष में दाखिला दिलाने के लिए आपराधिक साजिश के तहत फर्जीवाड़ा करने का आरोप था।
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गुवाहटी हाईकोर्ट की अगरतला बेंच ने गीता बनिक की याचिका पर सुनवाई के बाद 1996 में सीबीआई को मुकदमा दर्ज कर जांच का आदेश दिया था।
सीबीआई ने 1996 में इस मामले में 11 मुकदमे दर्ज किए थे। इनमें से तीन मामलों में मसूद का नाम था।
क्या था एमबीबीएस सीट घोटाला
सीबीआई ने मामले की जांच के बाद फर्जीवाड़े, फर्जी दस्तावेज बनाने और इस्तेमाल करने, आपराधिक साजिश के साथ भ्रष्टाचार की धाराओं में आरोप पत्र दाखिल किया था।
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आरोप पत्र में एजेंसी ने कहा कि एमबीबीएस कोर्स में दाखिले के लिए त्रिपुरा के तत्कालीन स्थानीय आयुक्त गुरदयाल सिंह के माध्यम से 1990-91 के शैक्षणिक सत्र के लिए कुछ उम्मीदवार नामित किए गए।
गुरदयाल सिंह गुजरात कैडर के आईपीएस अधिकारी थे, जो उस समय प्रतिनियुक्ति पर त्रिपुरा सरकार में थे।
तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री मसूद और गुरदयाल सिंह ने आपस में व उन उम्मीदवारों के साथ आपराधिक साजिश की जिन्हें दाखिले के लिए नामित किया जाना था, जबकि उसके लिए इनके पास पात्रता नहीं थी और वह गैर त्रिपुरा राज्यों के थे।
सीबीआई ने एक उम्मीदवार सच्चिदानंद द्विवेदी के बारे में कहा कि उसका पिता राजेंद्र द्विवेदी उत्तर प्रदेश में एक अखबार का संपादक था और वह अपने बेटे के लिए मेडिकल सीट के लिए मसूद से मिला।
मसूद ने इस संबंध में गुरदयाल सिंह को निर्देश दिया था।
क्या है सीट आवंटन
त्रिपुरा में राज्य का अपना कोई मेडिकल कॉलेज नहीं है। त्रिपुरा के योग्य और मेडिकल परीक्षा पास करने वाले छात्रों को स्वास्थ्य मंत्रालय के केंद्रीय पूल के जरिए देश के अन्य राज्यों के मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस व बीडीएस कोर्स में दाखिला दिलाया जाता है।
त्रिपुरा सरकार ने योग्य उम्मीदवारों के चयन के लिए 1988 में त्रिपुरा संयुक्त प्रवेश परीक्षा बोर्ड का गठन किया था।
कौन-कौन दोषी करार
तीस हजारी स्थित विशेष सीबीआई जज जेपीएस मलिक ने उक्त मामले में सांसद रशीद मसूद, त्रिपुरा राज्य के पूर्व स्थानीय आयुक्त गुरदयाल सिंह, पूर्व आईएएस अमोल कुमार राय, सुधीर रंजन, कांशी राम को दोषी करार दिया है।
तत्कालीन छात्रों रूपा घोष, हेमंत सालूजा, कुमारी कृति, गीती पुरी, उदय शंकर, गीता बनिक, सच्चिदानंद, विपुल कांत, सोनिया, संदीप पवार, अदनान मसूद को भी दोषी करार दिया है।