'बलात्कार पीड़िता को मिले 10 लाख रुपये मुआवजा'
सुप्रीम कोर्ट ने एक नई पहल करते हुए राज्य व केंद्र शासित प्रदेशों से बलात्कार पीड़िता को 10 लाख रुपये मुआवजा देने पर विचार करने के लिए कहा है। हालांकि अदालत ने स्पष्ट कहा कि कोई भी रकम बलात्कार पीड़िता केजख्म पर मरहम का काम नहीं कर सकता।
न्यायमूर्ति एमक्यू इकबाल और न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा की पीठ ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से गोवा की पीड़िता मुआवजा योजना पर विचार करने केलिए कहा है। गोवा में बलात्कार पीड़िता को दस लाख रुपये देने की योजना है। पीठ ने पाया कि बलात्कार पीड़िता पर हुए अपराध और उनकेपुनर्वास संबंधी योजनाएं सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अलग-अलग है।
पीठ ने कहा कि इनमें समानता होनी चाहिए। पीठ ने पाया कि मुआवजे की रकम कहीं 20 हजार है तो कई 10 लाख रुपये। पश्चिम बंगाल और मणिपुर में बलात्कार पीड़िता को महज 20 हजार रुपये मुआवजे का प्रावधान है, वहीं गोवा में मुआवजा 10 लाख रुपये है। वहीं महाराष्ट्र में इसके लिए किसी तरह के मुआवजे का प्रावधान नहीं है।
ये था पूरा मामला
शीर्ष अदालत ने ये निर्देश छत्तीसगढ़ की एक नेत्रहीन बलात्कार पीड़िता
केदोषी की सात साल की सजा को बरकरार रखते हुए दिए हैं। अदालत ने अपने आदेश
में राज्य सरकार को पीड़िता को उम्र भर प्रति महीने आठ हजार रुपये मुआवजा
देने का आदेश दिया है। पीठ ने इस मामले में पाया कि पीड़िता नेत्रहीन है और
उसकी कोई देखरेख करने वाला नहीं है। ऐसे में बेहतर यह होगा कि उसे मुआवजे
की एकमुश्त राशि देने की बजाए हर महीने आठ हजार रुपये मुआवजा दिया जाए।
पीड़िता की उम्र 35 वर्ष है।
मामले के मुताबिक, शादी का झांसा देकर
पड़ोस में रहने वाले व्यक्ति टेकन नामक व्यक्ति उसके साथ शारीरिक संबंध
बनाता रहा। इस क्रम में वह गर्भवती हो गई। जिसके बाद महिला ने टेकन को शादी
करने के लिए कहा लेकिन उसने इनकार कर दिया। पता चला कि टेकन शादीशुदा है
और उसकेचार बच्चे भी हैं।
महिला के शिकायत केआधार पर टेकन केखिलाफ बलात्कार
का मुकदमा दर्ज किया गया। पीड़िता ने अदालत में आवाज और छू कर आरोपी टेकन
की पहचान की। निचली अदालत ने उसे दोषी करार देते हुए सात वर्ष कैद की सजा
सुनाई थी, जिसे बाद में हाईकोर्ट ने बरकरार रखा था।