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मासूम को नहीं मिला आपबीती बयां करने का दूसरा मौका

Tue, 23 Jul 2013 12:06 AM IST
नई दिल्ली/पीयूष पांडेय
नई दिल्ली/पीयूष पांडेय Updated Tue, 23 Jul 2013 12:06 AM IST
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rape victim not got second chance to express pain

बलात्कार की शिकार एक बच्ची को खुद पर हुए जुल्म को बयां करने का मौका नहीं मिलेगा। सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल में उसे दोबारा गवाह के तौर पर शामिल करने से इंकार कर दिया है।

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जबकि इससे पहले अदालत ने कम उम्र और मासूमियत के आधार पर पीड़िता को इस हक से मरहूम कर दिया था। तब वह महज साढ़े छह साल की थी और अब ग्यारह की उम्र पार करने के बाद भी अदालत ने उसे यह मौका देने से इंकार कर दिया।
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बेबी पिंकी (बदला हुआ नाम) के साथ साढ़े पांच साल की उम्र में 2007 में बलात्कार हुआ था। घटना के बाद वह आपबीती अदालत को नहीं बता सकी थी, क्योंकि तब उसकी उम्र बहुत कम थी।
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तब ट्रायल कोर्ट ने उसे बाद में गवाह के तौर पर बुलाए जाने का निर्णय लिया था। लेकिन तीन साल बाद जब ट्रायल कोर्ट ने उसे बुलाया तो आरोपी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाकर पीड़िता को सिखा पढ़ाकर गवाही दिलाने की आशंका जताई। हाईकोर्ट ने आरोपी की दलील को सही मानते हुए बच्ची को गवाह के तौर पर शामिल करने से मना कर दिया।

जस्टिस बीएस चौहान की अध्यक्षता वाली पीठ ने पीड़िता की याचिका खारिज करते हुए कहा कि हाईकोर्ट का निर्णय इस मामले में सही है। कोर्ट का मानना है कि उसे सिखा पढ़ाकर गवाही दिलाई जा सकती है।

29 जनवरी, 2007 में बेबी पिंकी के साथ हुए बलात्कार के मुकदमे का ट्रायल करीब आठ माह बाद हाईकोर्ट में शुरू हुआ। तब अभियोजन ने पहली बार उसे गवाह के तौर पर पेश किए जाने की इजाजत मांगी। लेकिन अदालत ने पाया कि वह सवालों को समझ नहीं पा रही है और फिर उसे गवाह के तौर पर शामिल नहीं किया गया।


हालांकि अभियोजन ने तब उसकी गवाही बाद में कराए जाने की मांग की थी। ट्रायल कोर्ट ने पीड़िता को गवाही के लिए 21 जनवरी, 2010 को समन जारी किया।

इसके बाद आरोपी ने सिखाए पढ़ाए जाने की आशंका के आधार पर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। जहां बच्ची से उस पर हुए जुल्म की कहानी अदालत में बयां करने का हक छीन लिया गया।

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