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राजीव हत्याकांड ने तल्ख किए थे राव-सोनिया के रिश्ते!

Mon, 17 Feb 2014 03:10 PM IST
Updated Mon, 17 Feb 2014 03:10 PM IST
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Rao-sonia relation abnormal after rajeev gandhi death
पी वी नरसिम्हा राव के प्रधानमंत्री रहते सोनिया गांधी से उनके रिश्ते तल्ख हो गए थे। केंद्रीय खाद्य मंत्री के वी थॉमस की लिखी किताब में कहा गया है कि राव के शासन के दौरान राजीव हत्याकांड की सुस्त जांच से सोनिया खफा थीं। राव और सोनिया के बीच की कड़वाहट की यह एक अहम वजह थी।
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थॉमस की किताब ‘सोनिया-द बिलव्ड ऑफ मास’ में कहा गया है कि अगस्त, 1995 में सोनिया गांधी ने राजीव गांधी हत्याकांड की धीमी जांच पर सार्वजनिक तौर पर नाखुशी जाहिर की थी। दो साल बाद उनके सक्रिय राजनीति में उतरने का यह संकेत था।
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सोनिया और राव के बीच के असहज रिश्तों की पुष्टि पूर्व मंत्री नटवर सिंह ने भी की है। उन्होंने अपने एक लेख में उस घटना का जिक्र किया है, जब राव ने मई 1995 की एक रात उन्हें बुला कर कहा था कि सोनिया ने उन्हें किस कदर अपमानित किया है।
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...तो आम आदमी का क्या हाल होता होगा

Rao-sonia relation abnormal after rajeev gandhi death

थॉमस की किताब के मुताबिक जांच पूरी होने में हो रही बेइंतिहा देरी से क्षुब्ध सोनिया ने 20 अगस्त 1995 को राजीव की पुण्यतिथि पर कहा था कि जब पूर्व प्रधानमंत्री की हत्या की जांच पूरी होने में इतनी देरी हो रही है तो न्याय के लिए लड़ने वाले आम आदमी का क्या होगा? सोनिया का मानना था कि जब तक राव के सत्ता में रहते राजीव हत्याकांड की जांच पूरी होने वाली नहीं।

राव सरकार में जूनियर मंत्री रह चुके नटवर सिंह ने भी राव-सोनिया के रिश्तों की खटास के बारे में लेख में लिखा है। पिछले सप्ताह दैनिक अखबार के लिए लिखे लेख में नटवर ने 13 मई, 95 की उस घटना को याद किया है, जब राव ने उन्हें रेसकोर्स स्थित आवास पर रात को बुलाया था।

उस दिन राव रात नौ बजे अपने आवास पहुंचे, लेकिन वे बैठे नहीं। आम तौर पर निर्विकार रहने वाले राव उत्तेजित दिख रहे थे। वह कह रहे थे मैं अब उनसे और नहीं भिड़ सकता? मैं भिड़ भी सकता हूं, लेकिन चाहता नहीं। आखिर सोनिया चाहती क्या हैं?

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