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'फर्जी' एनकाउंटर को असली दिखाने के लिए पुलिस ने रखी बंदूक?

Fri, 27 Feb 2015 12:49 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बुलंदशहर
ब्यूरो/अमर उजाला, बुलंदशहर Updated Fri, 27 Feb 2015 12:49 AM IST
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ranbir encounter case.

शराब माफिया रनवीर एनकाउंटर मामले में पुलिस की कहानी में नया पेच फंस गया है। बृहस्पतिवार को मुठभेड़ के फौरन बाद की दो तस्वीरें मीडिया के हाथ लगीं। एक तस्वीर में रनवीर की लाश के पास बंदूक नहीं थी, जबकि दूसरी फोटो में शव के पास डीबीबीएल बंदूक दिखाई दे रही है। ऐसे में चर्चा है कि पुलिस ने ही केस मजबूत बनाने के लिए बंदूक रखकर पिक्चर खिंचवाई है। उधर, रेवाड़ी पुलिस को रनवीर की कोई क्राइम हिस्ट्री नहीं मिली है। परिजनों ने हरियाणा सरकारए केंद्र सरकार और मानवाधिकार आयोग के समक्ष मामला उठाने की बात कही है।

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मुठभेड़ थ्योरी में चौतरफा घिरी पुलिस की मुसीबतें और बढ़ गई हैं। विभागीय अफसरों की मानें तो रनवीर पुलिस पर फायर करके भाग रहा था। जवाबी फायरिंग में रनवीर मारा गया था। पुलिस का दावा
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है कि मुठभेड़ के वक्त रनवीर के हाथ में बंदूक थी। बृहस्पतिवार को हादसे की दो तस्वीरें मीडिया के सामने आईं। एक तस्वीर में रनवीर का शव पड़ा है। आसपास कुछ पुलिसकर्मी और बंदूक कहीं नहीं
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दिख रही। जबकि दूसरी तस्वीर में भी रनवीर मृत पड़ा है। आसपास पुलिस वाले हैंए लेकिन रनवीर के बाएं हाथ की बगल में एक डीबीबीएल बंदूक पड़ी है।

मीडिया में फोटो लीक होने की खबर आला अफसरों को पता चली तो हड़कंप मच गया। वरिष्ठ अफसरों ने पूरे मामले की डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश शुरू कर दी है। चर्चा है कि पुलिस ने ही यह बंदूक रखी है।

एसएसपी अनंत देव ने इस बारे में कहा कि मुठभेड़ के बाद मौजूद पुलिसकर्मियों ने शिनाख्त के लिए जेब से पर्स निकाला था। इसी दौरान बंदूक उठा ली होगी। बंदूक होने और न होने का जो अंतर फोटो में आया हैए वह उसी वक्त का होगा।

पुलिस के गले की फांस बनेगी कॉल डिटेल

ranbir encounter case.

रनवीर एनकाउंटर पुलिस के लिए गले की फांस बनता जा रहा है। शराब माफिया द्वारा लगाए गए आरोपों को पुलिस बिना जांच किए सिरे से खारिज कर रही है। वहीं एसएसपी ने गिरफ्तार परवेश त्यागी द्वारा दिए गए नंबर की कॉल डिटेल निकलवाकर आरोपी पुलिकसकर्मी के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है। जिससे साफ हो जाएगा कि आखिर मृतक रनवीर मोबाइल पर किस पुलिसकर्मी से रुपये लेकर ट्रक छोड़ने की बात कर रहा था।

जेल में राकेश और परवेश से मिलने आए उनके परिजन सुरेंद्र शर्मा, सुनील शर्मा और दिनेश शर्मा ने कहा कि रनवीर ट्रांसपोर्ट का काम करता था। पता नहीं कब शराब माफिया के चंगुल में आ गया। जेल में राकेश ने सुनील को बताया कि रनवीर के पास करीब 3.5 लाख रुपये थे। फोन पर पुलिसवाले ट्रक छोड़ने की एवज में पांच लाख रुपये मांग कर रहे थे। रुपये कम पड़ने पर बात नहीं बनी तो कार पर फायरिंग शुरू कर दी। मौत के डर से गाड़ी को भगाने लगे।

आरोप लगाए कि डिबाई पहुंचने पर पुलिस ने उसे घेरकर गोली मारी और उसके पास से 35 लाख रुपये लूट लिए। एसएसपी अनंत देव ने कहा कि परवेश द्वारा दिए गए नंबर की कॉल डिटेल निकलवाई जाएगी। जांच के बाद यदि कोई पुलिसकर्मी दोषी पाया जाता है तो उस पर कार्रवाई की जाएगी।

ताकि सीओ डिबाई पर ही गिरे गाज

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मुठभेड़ के चंद घंटों बाद तक सीना चौड़ाने वाले पुलिस के अफसर एफआईआर दर्ज कराने के नाम पर पीठ दिखा गए। सीओ डिबाई को हीरो बनाकर आगे खड़ा कर दिया। यदि एनकाउंटर की जांच हो तो गाज सिर्फ सीओ डिबाई पर गिरे। जबकि प्रेस वार्ता के बाद एसएसपी अपने ही बयान से पलट गए हैं। मुठभेड़ के दौरान इंस्पेक्टर खुर्जा को टीम के साथ पीछा करते हुए बताया था लेकिन अब वह इंस्पेक्टर को खुर्जा में बैठकर मॉनीटरिंग करना बता रहे हैं। एनकाउंटर के बाद हीरो बने सीओ डिबाई बह्मपाल सिंह डरे सहमे हुए हैं। मीडिया के आगे उनकी बोलती बंद हो जाती है। सवाल पूछने पर कप्तान की ओर इशारा कर देते हैं।

नहीं दर्ज होगी एफआईआर, कोर्ट जाएं परिजन : एसएसपी

मृतक रनवीर के परिजन पुलिस पर हत्या का आरोप लगा रहे हैं। परिजन पुलिसकर्मियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने की मांग कर रहे हैं। एसएसपी ने तहरीर मिलने के बाद एफआईआर दर्ज करने से साफ मना कर दिया। तहरीर में शामिल बिंदुओं को जांच में जोड़ने की बात कही है। एसएसपी अनंत देव ने कहा कि मृतक रनवीर और उसके साथी शराब माफिया थे। वे बड़े पैमाने पर शराब की तस्करी करते थे। सोमवार रात उन्होंने पुलिस की टीम पर फायरिंग शुरू कर दी है। एफआईआर दर्ज करने के सवाल पर एसएसपी ने रिपोर्ट दर्ज करने से साफ इंकार दिया।

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