SSP ने भाजपाई समझकर SDM को पीटा
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गलतफहमी का शिकार हुए एसएसपी ने महापंचायत स्थल गेट पर भाजपाइयों की गिरफ्तारी कर रहे एसडीएम/एसीएम मुरादाबाद को भाजपा कार्यकर्ता समझकर पीट दिया। पहले उन्हें थप्पड़ मारे फिर लाठी उठाकर पिटाई की। एसडीएम को पिटता देख एक तहसीलदार ने दौड़कर डीएम को सूचना दी तब जाकर एसएसपी ठहरे। इस बीच एसडीएम खुद को मजिस्ट्रेट बताते हुए चिल्लाते रहे लेकिन एसएसपी ने उनकी एक नहीं सुनी।
वाकया सुबह करीब साढ़े दस बजे का है। कांठ के एसडीएम रहे एसीएम विजयपाल सिंह थाने से चंद कदम की दूरी पर स्थित महापंचायत स्थल में घुसने की कोशिश कर रहे भाजपा कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी कर रहे थे। इस बीच उनकी पुलिस की भाजपा कार्यकर्ताओं से धक्का मुक्की भी हुई। इतने में एसएसपी धर्मवीर वहां आ गए। उन्होंने भाजपाइयों पर लाठीचार्ज करा दिया। एसएसपी खुद भी भाजपा कार्यकर्ताओं को पीटने लगे। इस बीच उन्होंने एसडीएम को भी भाजपा कार्यकर्ता समझकर पीट दिया।
विजयपाल सिंह ने बताया कि वह एसडीएम हैं लेकिन एसएसपी ने एक नहीं सुनी। कांठ के पूर्व तहसीलदार राजेश वर्मा ने जब एसडीएम को एसएसपी के हाथों पिटते देखा तो तुरंत थाने में बैठे डीएम को दौड़कर जानकारी दी। जिसके बाद डीएम मौके पर आए और एसएसपी को रोका। जिसके बाद एसएसपी ने एसडीएम से सॉरी बोला और डीएम ने दोनों अधिकारियों के हाथ मिलवाए। बाद में दोनों अधिकारी ऐसी किसी घटना से मुकरने लगे।
अफसरों की नाकामी बवाल की जिम्मेदार
नौ दिनों से अंदर ही अंदर कांठ धधक रहा था लेकिन अफसर हल्के में लेते रहे। भाजपा ने महापंचायत का ऐलान किया लेकिन आखिरी दिन तक पुलिस और प्रशासन तमाशा देखता रहा। समझौते का कोई ठोस प्रयास नहीं किया गया। नेताओं से भी ठीक से बातचीत नहीं की गई। आखिर उनकी नाकामी ने पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश को बवाल की आंच में धधका दिया है।
कांठ के चैदरी में 26 जून को धर्मस्थल से लाउडस्पीकर उतारने को लेकर बवाल शुरू हुआ था। अफसरों की अनदेखी की वजह से ही अगले दिन बड़ा बवाल हो गया था। तभी से बाजार बंद थे। लोगों में जबरदस्त गुस्सा था लेकिन प्रशासन अपनी हनक पर अड़ा हुआ था। कमिश्नर और डीआईजी ने कई बार चुनिंदा लोगों और वहां के व्यापारियों के साथ बैठकें की लेकिन मामला सुलटा नहीं। इसी बीच भाजपा ने महापंचायत का ऐलान किया था लेकिन उसे शुरू में हल्के में लिया जाता रहा।
3 जुलाई को विधायक अनीसुर्रहमान के घर पर समझौता वार्ता शुरू हुई लेकिन इसकी बुनियाद ही बेहद कमजोर रही। बड़े अफसर इस वार्ता से नदारद रहे। देर शाम तक समझौता कराया गया लेकिन उसे पब्लिक ने नकार दिया और फिर भाजपा ने पंचायत कराने का ऐलान कर दिया। देररात में अफसरों ने अपनी तैयारी शुरू की लेकिन कमजोर मन से। शुक्रवार को भी महापंचायत के लिए जाते भाजपाईयों को गिरफ्तार करके अफसर संतुष्ट होते रहे लेकिन लोगों का मूड नहीं भांप सके। यही गलती भारी पड़ गई और इतने बड़े बवाल को जन्म दे दिया।
खुफिया तंत्र फेल, पुलिस का ‘मैनेजमेंट जीरो’
यह तो आम लोग भी जानते हैं कि जब भी बड़े आंदोलन को रोकने की कोशिश हुई तो रेल ट्रैक निशाना बना लेकिन मुरादाबाद का न तो खुफिया विभाग और न हीं अफसर इस रणनीति को भांप सके। हाल यह था कि दोपहर तक रेलवे को एलर्ट नहीं किया गया था। न हीं अफसरों को कोई जानकारी दी गई थी। पुलिस और प्रशासनिक अफसर नेताओं की गिरफ्तारी और हाईवे पर फोकस किए हुए थे जबकि प्रदर्शनकारी खेतों से निकलकर रेलवे ट्रैक पर पहुंचते रहे।
शुरू से ही महापंचायत के ऐलान को अफसर हल्के में लेते रहे तभी तो आंदोलन को असफल करने की कोई खास रणनीति नहीं बनाई गई थी। भाजपा जब अपनी पंचायत पर अडिग रही तो देर रात में पुलिस लाइन में अफसरों को काल किया। मामूली ब्रीफिंग हुई जबकि ऐसे मामलों में पहले से ही धर पकड़ हमेशा होती रही है। आखिरी वक्त तक अफसर यही मानते रहे कि नेताओं की गिरफ्तारी के बाद मामला निपट जाएगा जबकि पिछला बवाल भी जनता ने ही किया था। गुरूवार को समझौता वार्ता नेताओं ने की लेकिन जनता ने नकार दिया लेकिन अफसर नेताओं के पीछे पड़े रहे और पब्लिक की ओर ध्यान ही नहीं दिया गया।
सारी फोर्स पाकबड़ा, मूंढापांडे, कांठ में महापंचायत स्थल के आसपास ही तैनात रही। जब सांसदों की गिरफ्तारी हो गई तो अफसर निश्चिंत होने लगे लेकिन इसी बीच कांठ स्टेशन की ओर लोग खेतों से होते हुए ट्रैक पर आ गए। बताया जाता है कि कल से ट्रैक जाम करने की तैयारी चल रही थी। ट्रैक के आसपास के क्षेत्रों में लोग मोटरसाइकिल से पहले ही पहुंच गए थे जिसे अफसर नहीं भांप सके। रेलवे एलर्ट न होने से प्रदर्शनकारियों के ट्रैक पर आने के बाद कुछ नहीं कर सका।
कांठ जाने की हिम्मत नहीं जुटा पाए आईजी
पूरे जोन से भाजपाई कूच कर चुके थे, मुरादाबाद में जगह-जगह गिरफ्तारियां हो रही थीं। लेकिन आईजी जोन को चिंता नहीं थी। रामपुर तक आए और वापस जाने का मन बना लिया था। पथराव में डीएम, एसएसपी समेत तमाम पुलिस अफसर घायल हो गए। तब वह मुरादाबाद पहुंचे। लेकिन फिर भी कांठ जाने की हिम्मत नहीं जुटा पाए।
कांठ में महापंचायत को लेकर कई दिन से शासन स्तर पर हलचल मची हुई थी। जुमे को देखते हुए शासन की ओर से अलर्ट था। शुक्रवार को सुबह से ही हर स्थिति पर नजर रखी जा रही थी। शासन ने आईजी जोन जकी अहमद को भी मौके पर जाने के लिए कहा था। लेकिन वे नहीं आए। सुबह बरेली से निकले और रामपुर जा पहुंचे। यहीं से पूछते रहे, अफसर भी ऑल ओके... कहते रहे। हालात बिगड़े और जब डीएम, एसएसपी, डिप्टी एसपी, इंस्पेक्टर समेत कई पुलिस और प्रशासनिक कर्मी चोटिल हो गए। तब चिंता हुई और आईजी शाम पांच बजे के बाद मुरादाबाद पहुंचे।
सर्किट हाउस में बैठकर हालातों की समीक्षा करने के बाद आईजी जोन ने कहा कि किन स्थितियों में बवाल हुआ। जब भाजपा नेता गिरफ्तारी दे चुके थे तो फिर वहां बवाल करने वाले कौन थे? यही जानने की कोशिश की जा रही है। माहौल को सामान्य बनाने के लिए कमिश्नर और डीआईजी को लगाया गया है। आईजी जोन ने कहा कि बिजनौर से कांठ स्टेशन पर रुकने के बाद लोगों ने ट्रैक घेर लिया। जब अफसरों ने समझाने की कोशिश की तो नारेबाजी और प्रदर्शन शुरू कर दिया। इसके बाद पथराव करने लगे। ग्रामीणों को भी उन्होंने अपने साथ मिला लिया। आईजी ने कहा कि बवाल करने वालों को चिन्हित करके उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।