जानिए क्या है निशंक के दावों का सच?
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उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी के सांसद रमेश पोखरियाल निशंक ने संसद में जो कहा उस पर पूरे भारत भर में चर्चा हो रही है। उन्होंने परमाणु बम, खगोल विज्ञान, सर्जरी और जेनेटिक साइंस पर कई उदाहरण दिए थे।
उन्होंने जो कहा उसके पक्ष और विपक्ष दोनों में बोलने वालों की कोई कमी नहीं। इस तरह की बातों से तमाम वेबसाइटें भरी पड़ी हैं और वीडियो की भी कोई कमी नहीं।
इंटरनेट खंगालने पर कई ऐसी चीजें मिलती हैं जो उनके दावों से मेल खाती हैं, वहीं कई ऐसी चीजें भी मिलती हैं जो उनके दावों पर सवालिया निशान लगा देती हैं।
आइए देखते हैं इंटरनेट पर क्या क्या सामान बिखरा पड़ा है जिससे निशंक जी की बातें इनती रोचक बन गईं जिनमें अब पूरा भारत रस ले रहा है।
ज्योतिष vs खगोल विज्ञान
निशंक ने अपनी बात में ज्योतिष विज्ञान पर भी खूब जोर दिया था। उन्होंने कहा था कि ज्योतिष एक ऐसा विज्ञान है, जिसके जरिए सालों बाद होने वाली घटना की गणना पहले ही की जा सकती है।
इतना ही नहीं, उन्होंने अन्य सभी प्रकार के विज्ञान को ज्योतिष विज्ञान के आगे बौना भी करार दिया और इसे दुनिया का सर्वश्रेष्ठ विज्ञान बताया। उन्होंने कहा कि इसे पूरी दुनिया में बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
सवाल ये है कि फिर मंगल पर यान भेजने की क्या जरूरत थी? क्या गणनाओं से मंगल के बारे में नहीं जाना जा सकता था? और केदारनाथ में हुई तबाही का क्या? ऐसा भविष्य क्यों नहीं बता पाए गणना करने वाले जिससे हजारों लोगों की जान बचाई जा सकती थी।
खैर, ये तो तय है कि नेताओं की रुचि हमेशा से इस विषय में रही है चाहे वह किसी भी पार्टी के हों। चंद्रास्वामी से लेकर नाथू लाल तक के चरणों में हमेशा नेता नमस्तक रहे हैं।
वैसे ज्योतिष एक प्राचीन विद्या है और दावा किया जाता है कि ग्रहों और उपग्रहों की चाल से भविष्य का पता लगाया जा सकता है। भविष्य का तो नहीं पता लेकिन अक्सर इस विद्या के नाम पर ज्योतिषी अपना धंधा जरूर चमका लेते हैं।
सबसे पहले परमाणु कम किसने और कब बनाया?
परमाणु टाइप करते ही इंटरनेट की दुनिया पर मानो भूचाल आ जाता है और सामने आते हैं तमाम तरह के नतीजे। कई वेबसाइटों और फेसबुक पेजों पर जैसा लिखा गया है उससे लगता है कि निशंक जी ने इंटरनेट पर काफी कुछ पढ़ा है।
एक जगह लिखा है कि,"महाभारत में कहा गया है कि ब्रह्मास्त्र से गर्भवती महिलाओं के गर्भ गिर गए, जापान में भी ऐसा ही हुआ था।
एक जगह तो एक वैज्ञानिक (http://en.wikipedia.org/wiki/J._Robert_Oppenheimer) के बारे में भी बताया है और लिखा है कि,"अमेरिका को पता था भारत की ताकत के बारे में और उन्होंने महाभारत ग्रंथ की सहायता से परमाणु बम का निर्माण किया। बनाने वाले ने प्रोजेक्ट का नाम त्रिदेव के नाम पर ट्रिनिटी रखा।"
विपक्ष में सवाल करने वाले लोग पूछ रहे हैं कि,"अगर ये विद्या थी तो कहां गायब थी? क्यों नहीं भारत ने पहले ही परमाणु बम बना लिया था? क्यों विदेशी वैज्ञानिकों की सहायता से इस बम को बनाया गया?"
लगता है कि पीएम मोदी जिस तरह इंटरनेट को सुलभ बनाने की कोशिशें कर रहे हैं और ई-गवर्नेंस को प्रमोट कर रहे हैं उसका गहरा असर उनके नेताओं पर पड़ा है और वे इंटरनेट से काफी कुछ सीख रहे हैं।
प्लास्टिक सर्जरी का अविष्कार भी भारत में!
सुश्रुत की बात करते तो गनीमत होती लेकिन निशंक ने बात की भी तो सीधे गणेश जी की। उन्होंने दावा किया कि भगवान गणेश की सर्जरी की गई थी और इससे साफ है कि भारत ही इस विद्या का जनक है।
इंटरनेट पर हजारों पन्ने इस तथ्य से भरे हुए हैं कि प्लास्टिक सर्जरी का अविष्कार भारत में ही हुआ था। दरअसल खुद पीएम मोदी ने ही पहले कहा था कि गणेश जी की सर्जरी की गई थी।
तकरीबन हर बच्चे के वो कहानी सुनी है जिसमें बताया गया है कि भगवान शिव ने गणेश का सिर काट दिया था और फिर पार्वती जी के क्रोध के कारण उन्हें हाथी का सिर बाल गणेश को लगाना पड़ा था।
भगवान ने तो ये काम चमत्कार से किया था फिर अब सर्जरी की बात कहां से आई। भगवान को भगवान रहने दीजिए सर वरना नई कहानी में तो बच्चे कन्फ्यूज़ हो जाएंगे कि नई कहानी पर भरोसा करें या फिर पुरानी कहानी पर।
निशंक जी सोचिए जरा कि अगर ऐसा हुआ तो चमत्कारों पर से भरोसा उठ सकता है और फिर आस्था भी खतरे में आ सकती है।
जेनेटिक साइंस पर दावा
कहा गया कि कर्ण का जन्म और कौरवों का जन्म जिस तरह से हुआ उससे साफ है कि उस वक्त भारत जेनेटिक साइंस में बहुत आगे था और टेस्ट ट्यूब बेबी तथा क्लोन बनाए जाने संभव थे।
लीजिए साहब बेवजह ही Robert Edwards ने नोबेल पा लिया। ऐसे लोगों की कोई कमी नहीं जो इस बात पर भरोसा करते हैं कि भारत में यह तकनीक मौजूद थी।
इंटरनेट के एक पेज पर लिखा है कि,"गांधारी ने 100 मटकों में रसायन भरे थे और फिर बच्चे हुए। ये टेस्ट ट्यूब बेबी नहीं तो क्या है।"
कुछ वक्त पहले मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में पीएम ने कहा था कि,"महाभारत में कर्ण की कथा हम सबने पढ़ी है। लेकिन कभी हम थोड़ा सा और सोचना शुरु करें तो ध्यान में आएगा कि महाभारत का कहना है कि कर्ण मां की गोद से पैदा नहीं हुआ। इसका मतलब ये है कि उस समय जेनेटिक साइंस मौजूद था। तभी तो मां की गोद के बिना कर्ण का जन्म हुआ होगा।"
इसके बाद तो मानिए जैसे इंटरनेट पर ये साबित करने की होड़ मच गई कि जेनेटिक साइंस के इन चमत्कारों में भारत ने उस वक्त सफलता हासिल की थी जब बाकी दुनिया कच्चा मांस खा रही थी।
आखिर सच क्या है?
निशंक जी ने तो शायद इंटरनेट के बल पर काफी ज्ञान हासिल किया है लेकिन इंटरनेट पर ये ज्ञान आया कहां से? थोड़ा तलाश करने पर विमान और उनके अविष्कारकर्ता भी मिल गए। विकीपीडिया पर इसके बारे में काफी बताया गया है और वो भी सचित्र।
एक जगह तो लिखा है कि अफगानिस्तान की गुफाओं में विमान मिल गया और टाइम मशीन भी। पहिए से लेकर हथियारों तक के बारे में दावा किया गया है कि ये अविष्कार भारतीयों ने किए थे।
दावों पर कोई सवाल नहीं लेकिन क्या ये ऐसा नहीं लगता कि ये कथाएं कुछ कुछ ऐसी ही हैं जैसा कि हिस्ट्री टीवी पर आना वाला कार्यक्रम एंसिएंट एलियन्स। जिसके एक एपिसोड में बौद्ध मठों को एलियन्स के विमानों से प्रेरित बता दिया गया। यहां तक कहा गया कि जिन्हें भगवान समझा गया दरअसल वे एलियन थे।
इस दावों और प्रतिदावों पर बहस करने की अपेक्षा ये क्यों ना मान लिया जाए ये अविष्कार उन्हीं वैज्ञानिकों ने किए जिन्हें अभी तक इनका अविष्कारकर्ता माना जाता है।