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निशंक ने किया परमाणु परीक्षण पर बड़ा दावा

Thu, 04 Dec 2014 05:18 PM IST
Updated Thu, 04 Dec 2014 05:18 PM IST
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ramesh pokhriyal nishank give statement at nuclear test

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पार्टी के सांसद लगता है उनसे आगे की सोच रखते हैं। इसलिए उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने संसद में पीएम मोदी के उस बयान को सौ फीसदी सही बताया जिसमें उन्होंने गणेश के अंग प्रत्यारोपण की बात कही थी। निशंक यहीं नहीं रुके, उन्होंने तो ये तक दावा कर दिया कि जो परमाणु परीक्षण इस सदी में किए गए वो भारत में दूसरी सदी में ही कर लिए गए थे।

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उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी के सांसद रमेश पोखरियाल निशंक ने संसद में अपने भाषण में कहा है कि भारत का ज्ञान और विज्ञान किसी से भी पीछे नहीं है। उन्होंने कहा कि आज सभी परमाणु परीक्षण की बात करते हैं, लेकिन सालों पहले दूसरी सदी में ही संत कणाद ने परमाणु परीक्षण कर लिया था। निशंक ने कहा कि प्लास्टिक सर्जरी और जेनेटिक साइंस भी भारत में बहुत पुराने समय से मौजूद है।
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प्लास्टिक सर्जरी का उदाहरण उन्होंने भगवान गणेश की गर्दन जोड़ने से और जेनेटिक साइंस का उदाहरण कर्ण के जन्म से दिया। निशंक ने कहा कि लोग मोदी जी द्वारा भगवान गणेश की सर्जरी होने की बात पर सवाल उठा रहे हैं, लेकिन वह वास्तव में एक सर्जरी थी। बात को आगे बढ़ाते हुए वे बोले कि कटे हुए सिर को जोड़ देने जैसा विज्ञान पूरी दुनिया में सिर्फ भारत में ही देखा गया है।

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'ज्योतिष के आगे विज्ञान बौना'

ramesh pokhriyal nishank give statement at nuclear test

निशंक ने अपनी बात में ज्योतिष विज्ञान पर भी खूब जोर दिया। उन्होंने कहा कि ज्योतिष एक ऐसा विज्ञान है, जिसके जरिए सालों बाद होने वाली घटना की गणना पहले ही की जा सकती है। इतना ही नहीं, उन्होंने अन्य सभी प्रकार के विज्ञान को ज्योतिष विज्ञान के आगे बौना भी करार दिया और इसे दुनिया का सर्वश्रेष्ठ विज्ञान बताया, जिसे पूरी दुनिया में बढ़ावा देने की बात कही।

जब कुछ सांसदों ने ज्योतिष को लेकर निशंक के इस बयान का विरोध किया तो उन्होंने कहा कि इस पर चर्चा होनी चाहिए और साथ ही इसे उचित सम्मान मिलना चाहिए। निशंक ने जवाहरलाल नेहरू की तारीफ करके कांग्रेसी सांसदों को भी खुश किया। वे बोले कि हर किसी को नेहरू की भारत की खोज (डिस्कवरी ऑफ इंडिया) को पढ़ना चाहिए, जिन्होंने भारत की परंपरा और मान्यताओं को बढ़ावा दिया है।

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