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टैक्स चोरी में फंसा बाबा रामदेव का ट्रस्ट

कानपुर/संजय त्रिपाठी Updated Sat, 13 Oct 2012 12:22 AM IST
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 Ramdev's trust involved in tax evasion
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आयकर विभाग ने बाबा रामदेव के ‘पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट’ को आयकर छूट के दायरे से बाहर करते हुए ट्रस्ट पर करोड़ों रुपए की टैक्सेबल इन्कम निकाली है। इस राशि पर टैक्स निर्धारित किया है और जानबूझकर टैक्स चोरी करने के आरोप में पेनाल्टी भी ठोंकी गई है। इस संबंध में ट्रस्ट को नोटिस जारी किया गया है। इस कार्रवाई के पीछे ट्रस्ट द्वारा विदेशों में किए जा रहे चैरिटी के कार्यों और कॉमर्शियल एक्टिविटी का हवाला दिया गया है। उधर बाबा रामदेव की ओर से इस मामले को लेकर अपील में जाने की तैयारी की जा रही है।
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कर निर्धारण वर्ष 09-10 में रामदेव के प्रमुख ट्रस्ट ‘पतंजलि योगपीठ’ का असेसमेंट एडिशनल डायरेक्टर (एक्जंप्शन) नई दिल्ली द्वारा किया गया है। आयकर विभाग के सूत्रों के अनुसार वहां से 24 अगस्त को जारी आयकर निर्धारण आदेश में कहा गया है कि ट्रस्ट ने अपनी टैक्सेबल इन्कम निल दिखाई थी। लेकिन इन्कम टैक्स अधिकारियों ने जांच के बाद ट्रस्ट की टैक्सेबल इन्कम 72 करोड़ 37 लाख 98 हजार 965 घोषित की है। इसके साथ ही लगभग 13 करोड़ 70 लाख की ऐसी डोनेशन पाई गई हैं, जिनके दानदाताओं का कोई पता नहीं है।

आयकर कानून की धारा-115 (बीबीसी) के अनुसार ऐसी डोनेशन पर 30 परसेंट टैक्स लगाया गया है। आयकर अधिकारियों के अनुसार टैक्स चोरी जानबूझकर की गई थी। इसलिए धारा 271 (1सी) के तहत टैक्स डिमांड के बराबर पेनाल्टी भी लगाई गई है। आयकर निर्धारण आदेश में असेसिंग अफसर ने कहा है कि इस संस्था का जन्म दो फरवरी 2005 में 25 हजार रुपए के फंड से हुआ था। फंड बढ़कर 31 मार्च 09 में 3 करोड़ 39 लाख 75 हजार रुपए हो गया।

आयकर विभाग ने इस बात पर घोर आपत्ति जाहिर की कि बायलॉज के हिसाब से सारे अधिकार प्रेसीडेंट बाबा रामदेव को दे दिए गए जो आजीवन प्रेसीडेंट बने रहेंगे। किसी भी मुद्दे पर उनका ही निर्णय अंतिम होगा। आयकर विभाग के मुताबिक ट्रस्ट ने अपनी आय का प्रयोग भारत के बाहर भी किया है। विभाग ने इसको आधार मानते हुए यह बात भी स्थापित की है कि चैरिटेबल संस्था को आयकर कानून के तहत छूट लेने के लिए भारत के भीतर ही गतिविधियां करनी चाहिए। यह आपत्ति भी लगाई है कि ट्रस्ट डीड में इलेक्शन का कोई प्रावधान नहीं है।

साथ ही साथ कई उदाहरणों का उल्लेख करते हुए यह सिद्ध किया है कि ट्रस्ट चैरिटेबल गतिविधियों के अतिरिक्त व्यावसायिक गतिविधियों में भी शामिल है। आदेश में कहा गया है कि ट्रस्ट ने जमीन खरीदने के लिए भारी रकम एडवांस के तौर पर बिल्डरों को दी लेकिन यह रकम न तो वापस ली गई और न ही इसके बदले जमीन की रजिस्ट्री कराई गई। आयकर विभाग ने ट्रस्ट की खाता बहियों की जटिलताओं को देखते हुए दिल्ली की एक चार्टर्ड एकाउंटेंट फर्म ‘मेसर्स एससी एसोसिएट्स’ को स्पेशल ऑडिटर नियुक्त किया था।

करीब 22 करोड़ निकलेगी टैक्स और पेनाल्टी
कानपुर। आयकर विभाग की इस तरह की कार्रवाई में पहले नोटिस भेजा जाता है और फिर टैक्स और पेनाल्टी का डिमांड नोट जारी किया जाता है। आयकर मामलों की विशेषज्ञ सीए पूजा श्रीवास्तव के अनुसार ट्रस्ट की आय (72 करोड़ 37 लाख 98 हजार 965 रुपए) पर 10 फीसदी टैक्स के हिसाब से करीब 7.23 करोड़ की देनदारी निकलेगी और बिना नाम-पते की डोनेशन (13 करोड़ 70 लाख) पर 30 परसेंट के हिसाब से करीब 4 करोड़ रुपए का टैक्स बनेगा। यानी कुल करीब 11.23 करोड़। पेनाल्टी 100 परसेंट तक लगाने का प्रावधान है। इस हिसाब से ट्रस्ट पर कुल टैक्स और पेनाल्टी की रकम लगभग 22.50 करोड़ रुपए होगी।
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