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नक्सली हमले ने बढ़ाई रमन सिंह की मुश्किलें
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Mon, 27 May 2013 08:49 AM IST
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छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में बीते शनिवार को हुए नक्सली हमले ने जहां कांग्रेस को बुरी तरह से कमजोर किया है, वहीं राज्य सरकार को सवालों के घेरे में उलझा दिया है।
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राज्य के मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह अपने कार्यकाल के दसवें साल में अब तक की सबसे बड़ी परेशानी में घिरे हैं।
विधान सभा चुनाव से ठीक पहले हुई इस घटना ने जीत की हैट्रिक लगाने का मंसूबा पाले बैठे रमन की राह में कई रोड़े अटका दिए हैं।
इस घटना ने सुरक्षा चूक से संबंधित कई बड़े सवाल खड़े किए हैं। जाहिर है कि इन सवालों का जवाब देना आसान नहीं होगा। वह भी तब जब सिर पर विधान सभा चुनाव की तलवार लटकी हो।
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छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के शीर्ष नेताओं की हत्या के बाद नक्सल खतरा बढ़ गया है। इसी के चलते रमन सिंह को ‘जेड प्लस’ सुरक्षा मिल गई है।
शनिवार को सुकमा में हुए नक्सली हमला मामले में राज्य के मुख्यमंत्री को कई तरह के हमलों से दो चार होना पड़ेगा।
केंद्रीय गृह मंत्रालय का दावा है कि हमला से संबंधित खुफिया सूचना से पहले ही राज्य सरकार को अवगत करा दिया गया था।
फिर इस हमले में मारे गए राज्य विधान सभा में प्रतिपक्ष के नेता रहे महेंद्र कर्मा पहले से ही हिट लिस्ट में थे। इसी कारण उन्हें जेड प्लस की सुरक्षा उपलब्ध कराई गई थी।
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ऐसी सुरक्षा पाने वालों के लिए कई तरह के दिशा निर्देश हैं। इसके अलावा सर्वाधिक महत्वपूर्ण सवाल कांग्रेस की इस परिवर्तन यात्रा में राज्य के सभी शीर्ष नेताओं की शिरकत के बावजूद फुलप्रूफ सुरक्षा का इंतजाम न होना है।
जाहिर है कि घटना से उत्पन्न शोक की छाया खत्म होते ही मुख्यमंत्री को इन सवालों से दो-चार होना पड़ेगा।
उल्लेखनीय है कि बीते लगभग दस सालों में विपक्षी कांग्रेस को खासतौर से मुख्यमंत्री के खिलाफ कोई बड़ा मुद्दा हाथ नहीं लगा था।
हालांकि इसी साल जनवरी महीने में आदिवासी छात्राओं के यौन शोषण मामले और दो मुठभेड़ों में निर्दोष आदिवासी किशोरों की मौत के कारण भी मुख्यमंत्री मुश्किलों में घिरे थे।
मगर शनिवार की घटना ने उनके लिए अगर-मगर की गुंजाइश खत्म कर दी है। भाजपा को डर है कि इस हमले के बाद लोगों की सहानुभूति कहीं कांग्रेस से न जुड़ जाए।
अगर ऐसा हुआ तो न केवल रमन की चुनावी हैट्रिक का सपना अधूरा रह सकता है, बल्कि लोक सभा चुनाव से ठीक पहले छत्तीसगढ़ में सत्ता गंवाने के कारण बड़ा राजनीतिक झटका भी लग सकता है।