16 जवानों की हत्या के बाद रमन सिंह की मंशा पर उठे सवाल
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चुनाव से पहले छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के लगातार हो रहे हमले ने राज्य के मुख्यमंत्री रमन सिंह की मंशा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे फिलहाल इन हमलों के लिए राज्य सरकार को दोषी करार देने से बच रहे हैं।
लेकिन गृह मंत्रालय और सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारी इसे राज्य सरकार की ढिलाई का नतीजा बता रहे हैं। केंद्र के मुताबिक बिहार और झारखंड की सरकारों का ढीला रवैया भी नक्सली हिंसा के लिए काफी संवेदनशील बनता जा रहा है।
चुनावों के बहिष्कार के लिए नक्सली तैयार?
खुफिया एजेंसियों के मुताबिक चुनावी समीकरण की वजह से राज्य सरकार नक्सलियों पर नकेल नहीं डाल पा रही है, जबकि नक्सली चुनाव के बहिष्कार के लिए इस बार पूरी तरह हिंसा पर उतारू हैं।
गृह मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक बस्तर का जंगल सामरिक लिहाज से नक्सलियों का गढ़ है। इसी जंगल से नक्सली झारखंड, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और बिहार के जंगलों में आवाजाही करते हैं। लेकिन छत्तीसगढ़ सरकार केंद्र की कई हिदायतों के बावजूद अपनी सीमा को मजबूत करने का काम पूरा नहीं कर पाई है।
मंत्रालय के मुताबिक केंद्र अर्धसैनिक बलों को तैनात करने के अलावा वहां के प्रशासनिक मामलों में कोई दखल नहीं दे सकता। यह बल स्थानीय पुलिस के नेतृत्व में काम करते हैं। लेकिन उनका सहयोग नहीं मिलने की वजह से अर्धसैनिक बल अपने आक्रामक तेवर में नहीं आ पा रहे हैं।