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आखिर क्यों खास है राम-सीता विवाह की यह पेंटिंग?

Wed, 16 Dec 2015 08:35 AM IST
Updated Wed, 16 Dec 2015 08:35 AM IST
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Rama and Sita marriage paintings

भोले की नगरी काशी में राम विवाह के उत्सव बुधवार को मंदिरों, मठों में यादगार बनेंगे। संकट मोचन मंदिर में नौ दिनी मानस नवाह्न पारायण यज्ञ शुरू होगा।

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इसमें चुनिंदा मानस मर्मज्ञों और राम कथा व्यासों का भी जमावड़ा हो रहा है। इस मौके पर तुलसी घाट पर तहजीब के तौर पर संजोई गई राम विवाह की वह पेंटिंग भी लोगों का ध्यान खींचेगी, जिसे 1910 में लाहौर के एक मुसलिम चित्रकार ने बनाया था।
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राम विवाह पंचमी की पूर्व संध्या पर तुलसी घाट स्थित अखाड़ा गोस्वामी तुलसी दास के मानस संग्रहालय में रखी गई पेंटिंग चित्रकला की खास निशानी है। इस चित्रकृति में राजा जनक के दरबार के दृश्यों को रंगों -रेखाओं से इस कदर उकेरा गया है कि वह आज भी जीवंत हैं।
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स्वयंवर के बाद जनक के दरबार में सीता भगवान राम को वरमाला पहनाने के लिए बढ़ती नजर आ रही हैं। जनक के महल के परिदृश्य में ब्रह्मा, विष्णु, महेश भी उन क्षणों को जीते नजर आ रहे हैं।

1910 में लाहौर के एक मुसलिम चित्रकार ने बनाई थी

Rama and Sita marriage paintings

लाहौर के हाफटोन प्रकाशन से प्रकाशित उर्दू रामायण में यह पेंटिंग प्रकाशित भी है लेकिन जिस मुसलिम चित्रकार ने इसे उकेरा उसका नाम नहीं दिया गया है।

इस संग्रहालय के लिए पांडुलिपियों की खोज करने वाले पांडुलिपि विशेषज्ञ उदय शंकर दुबे का कहना है कि इस पेंटिंग को मुसलिम चित्रकार ने ही बनाया है लेकिन उसका नाम उस दौर की लेखन परंपरा में नाम छापने के रचनाकार बचते थे। संभवत: उसी परंपरा का निर्वाह करते हुए उनका नाम चित्रकृति पर अंकित नहीं है।

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