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अपनों-परायों के द्वंद्व में जीत तलाश रहे पासवान

Sun, 20 Apr 2014 07:45 AM IST
Updated Sun, 20 Apr 2014 07:45 AM IST
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ram vilas paswan looking for win

सबको चौंकाते हुए अचानक भाजपा और एनडीए के जहाज में सवार हुए लोक जनशक्ति पार्टी के नेता राम विलास पासवान हाजीपुर में अपने और परायों के द्वंद्व में उलझे हैं और इसी से अपनी जीत का रास्ता तलाश रहे हैं।

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कल तक जो राजद कार्यकर्ता और समर्थक पासवान का झंडा उठा रहे थे, आज वह उनके खिलाफ मोर्चा लगाए हैं और जो भाजपा समर्थक खिलाफ थे, जीत के लिए पासवान को उन पर ही भरोसा करना पड़ रहा है। लेकिन अपनी जीत के प्रति रामविलास पासवान बेहद आश्वस्त हैं।
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पटना में अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने कहा कि पूरे देश में बदलाव की हवा है। बिहार भी उससे अछूता नहीं है। उन्हें हाजीपुर के लोगों का विश्वास जीतने का पूरा भरोसा है।

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पासवान के खिलाफ हाथ मिला सकते हैं नीतीश-लालू

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पासवान के खिलाफ एक तरफ निवर्तमान सांसद और जद(यू) उम्मीदवार रामसुंदर दास हैं तो दूसरी तरफ कांग्रेस के उम्मीदवार संजीव टोनी भी खम ठोंक रहे हैं।

चर्चा तो यह भी है कि बिहार की राजनीति के दो विपरीत ध्रुव मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख लालू प्रसाद यादव पासवान के खिलाफ आखिर में अंदरखाने हाथ भी मिला लें तो कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए।

हाजीपुर से कई बार जीत चुके हैं पासवान

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राष्ट्रीय नेता और दलित राजनीति के बड़े चेहरे की छवि राम विलास पासवान की ताकत है और उनके पीछे अपने दलित जनाधार जिसमें बहुतायत सजातीय पासवान मतदाता हैं, के साथ साथ भाजपा का सवर्ण जनाधार भी मजबूती से खड़ा है।

लेकिन रामसुंदर दास की बेदाग छवि और जद(यू) के अति पिछड़े जनाधार तो दूसरी तरफ लालू प्रसाद यादव के यादव और मुस्लिम वोट बैंक के बल पर संजीव टोनी के जरिए पासवान को दोनों तरफ से घेरने की कोशिश हो रही है।

हाजीपुर पासवान के लिए नया नहीं है। 1977 में पासवान ने यहां से चुनाव जीतने का रिकॉर्ड बनाया था। पासवान कई बार यहां से जीत चुके हैं। रेलमंत्री रहते हुए उन्होंने हाजीपुर के लिए काफी कुछ किया भी है। हाजीपुर रेलवे का बड़ा केंद्र है।

'पुराना रिकॉर्ड तोड़कर लोकसभा में पहुंचेंगे पासवान'

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पासवान का कद अपने दोनों प्रतिद्वंद्वियों की तुलना में खासा बड़ा है। इसीलिए हाजीपुर स्टेशन रोड पर चाय की दुकान पर बैठे रामचंद्र भगत कहते हैं कि रामविलास पासवान इस बार अपना ही पुराना रिकॉर्ड तोड़कर लोकसभा में पहुंचेंगे।

उनकी बात का पास बैठे दूसरे लोग भी समर्थन करते हैं। इनके मुताबिक हाजीपुर में मोदी-रामविलास की मिली जुली लहर है जिसमें विरोधी बह जाएंगे।

आंकड़ों के मुताबिक हाजीपुर लोकसभा क्षेत्र में सबसे ज्यादा यादव मतदाता करीब पांच लाख हैं। इसके बाद कुशवाहा करीब सवा दो लाख, राजपूत करीब सवा दो लाख,भूमिहार करीब सवा लाख, मुसलमान करीब दो लाख, ब्राह्मण करीब चालीस हजार, पासवान करीब दो लाख, दास करीब तीन लाख और कुर्मी करीब 75 हजार हैं।

जातीय गणित और समर्थन को लेकर अपने अपने अलग अलग दावे हैं। लेकिन पासवान निश्चिंत हैं कि हाजीपुर की जनता एक बार फिर उन्हें अपना विश्वास देगी।

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