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अपने चिराग को रोशन करेंगे पासवान

Wed, 02 Apr 2014 12:54 PM IST
Updated Wed, 02 Apr 2014 12:54 PM IST
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ram vilas paswan convencing for son chirag

चिराग बिहार की राजनीति में अपने चिराग को रोशन करने के लिए लोक जनशक्ति पार्टी के नेता राम विलास पासवान ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता और भारतीय जनता पार्टी का पूरा तंत्र पासवान के युवा पुत्र चिराग पासवान की ताकत है जिसके बल पर वह नक्सल प्रभावित मध्य बिहार के इस दूरदराज इलाके में अपनी पहली सियासी जीत की मंजिल पाने के लिए दिन रात एक किए हुए हैं।

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दस अप्रैल को जमुई में मतदान है इसलिए लोजपा-भाजपा, जद(यू) और राजद ने यहां प्रचार तेज कर दिया है। नीतीश कुमार, लालू प्रसाद यादव और राम विलास पासवान ताबड़ तोड़ सभाएं कर रहे हैं। चिराग त्रिकोणीय मुकाबले में फंसे हुए हैं।
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वहीं, राजद के सुधांशु शेखर भास्कर की तुलना में जद(यू) उम्मीदवार उदय नारायण चौधरी जो विधानसभा अध्यक्ष भी हैं, को ज्यादा मजबूत माना जा रहा है, लेकिन चौधरी का पलड़ा तभी भारी होगा जब इलाके के कद्दावर राजपूत नेता और नीतीश कुमार सरकार के वरिष्ठ मंत्री नरेंद्र सिंह का रुख उनके अनुकूल हो जाए।

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मुस्लिम मतदाताओं का पलड़ा भारी

ram vilas paswan convencing for son chirag

नरेंद्र सिंह जिनके दो बेटे इस क्षेत्र की दो विधानसभाओं जमुई और चकई से विधायक हैं, ने अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं। चिराग के सियासी भविष्य का फैसला इलाके के करीब डेढ़ लाख मुस्लिम मतदाताओं के रुख से भी तय होगा, जो अभी नीतीश कुमार और लालू प्रसाद यादव को लेकर असमंजस में हैं।

जमुई केचूड़ी बाजार में चूडियों पर लाख चढ़ा रहे सुलेमान खां कहते हैं कि अभी उन्होंने और उनकी कौम ने तय नहीं किया है कि किसे वोट देना है। यह फैसला चुनाव के एक दिन पहले किया जाएगा और फिर सबको खबर कर दी जाएगी।

अगर नरेंद्र सिंह जद(यू) केपक्ष में खुलकर आ गए तो चौधरी और चिराग के बीच सीधा मुकाबला हो जाएगा, तब मुस्लिम मतों का झुकाव जद(यू) की तरफ हो सकता है, जिससे चिराग की मुश्किल बढ़ सकती है।

चिराग की फिल्मी छवि जहां युवा मतदाताओं को लुभा रही है, वहीं चालीस साल से ज्यादा की उम्र वाले प्रौढ़ मतदाताओं को आशंका है कि चुनाव जीतने के बाद कहीं चिराग दूसरे फिल्मी सितारों की तरह उनके लिए अदृश्य न हो जाएं।

विरासत की राजनीति का फायदा

ram vilas paswan convencing for son chirag

जमुई के महसौढी के गांधी मार्किट बृजेश्वर सिंह, बबलू सिंह, विनोद कुमार और भवेश जैसे युवाओं को चिराग बेहद पसंद हैं। बृजेश्वर कहते हैं कि चिराग युवा हैं। उन्हें राजनीति विरासत में मिली है। बेदाग छवि है और सोच अच्छी है।

बबलू सिंह जोड़ते हैं कि सबसे बढ़कर लोक जनशक्ति पार्टी से ज्यादा भाजपा और नरेंद्र मोदी के उम्मीदवार हैं, क्योंकि उन्होंने ही अपने पिता रामविलास पासवान को भाजपा के साथ गठबंधन के लिए राजी किया।

माना जा रहा है कि शुरु में पासवान गठबंधन के लिए राजी नहीं थे। भवेश कहते हैं कि इसलिए लोजपा के साथ-साथ चिराग को जिताने की भाजपा कार्यकर्ताओं की भी जिम्मेदारी बढ़ गई है। लेकिन दूसरी तरफ जमुई से बाहर निकल कर भजौर गांव में जाने पर राम बचन सिंह, कृष्णा सिंह जैसे उम्र दराज लोग उम्मीदवार के तौर पर उदय नारायण चौधरी को ज्यादा अच्छा मानते हैं।

उनके मुताबिक चौधरी मंजे हुए राजनेता हैं। बिहार विधानसभा के अध्यक्ष हैं और जीतने के बाद भी इलाके में आते जाते रहेंगे। जबकि चिराग तो फिल्मी हैं, चुनाव जीतने के बाद ज्यादा वक्त दिल्ली और मुंबई में ही बिताएंगे।

चिराग को दोहरे लाभ की उम्मीद

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चिराग के चुनाव प्रबंधन की जिम्मेदारी उनके चाचा और बिहार केपूर्व मंत्री पशुपति पारस संभाल रहे हैं।

जमुई के इंटरनेशनल होटल के अपने कमरे में बैठे पशुपति पारस दावा करते हैं कि बहुत भारी अंतर से चिराग चुनाव जीतेंगे। पारस कहते हैं कि उनका परिवार मुंगेर जिले का रहने वाला है और जमुई कभी मुंगेर जिले का हिस्सा रह चुका है।

इसलिए चिराग को बाहरी नहीं माना जा सकता, जबकि जद(यू) के उदय नारायण चौधरी गया और राजद के सुधांशु शेखर भास्कर बांका के रहने वाले हैं।

पारस के मुताबिक चिराग को एक तरफ मोदी लहर का फायदा मिलेगा तो दूसरी तरफ स्थानीय जनता मानती है कि चिराग की जीत से इस इलाके को चिराग और उनके पिता राम विलास पासवान दोनों का संरक्षण और सहयोग मिलेगा। लोजपा के स्थानीय नेता टुनटुन भगत भी चिराग की जीत का दावा करते हैं।

दिन रात हो रही कसरत

ram vilas paswan convencing for son chirag
वहीं, उनके पास ही बैठे मनोहर प्रसाद गुप्ता कहते हैं कि चिराग तीसरे नंबर पर रहेंगे। गुप्ता के मुताबिक चिराग के पास वोट तो है, लेकिन उनका चुनाव प्रबंधन बेहद खराब है।

वैसे चिराग खुद जबर्दस्त मेहनत कर रहे हैं। उनका ज्यादा जोर रोड शो पर है। वह सुबह दस बजे निकलकर रात दस बजे तक गांव गांव में रोड शो और छोटी नुक्कड सभाएं करते हैं।

जमुई से करीब 70 किलोमीटर दूर चकई विधानसभा क्षेत्र में उनके रोड शो में अच्छी भीड़ जुटी। अपने बेटे को जिताने के लिए पिता राम विलास पासवान अपने चुनाव क्षेत्र हाजीपुर से हेलीकॉप्टर से उड़कर जमुई पहुंचते हैं। जनसभाएं करते हैं और वापस पटना चले जाते हैं।

पासवान जितनी मेहनत अपने क्षेत्र में कर रहे हैं, उतना ही ध्यान वह चिराग के लिए जमुई में भी दे रहे हैं।
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