'किसी भी सूरत में नहीं तोड़ा जाएगा राम सेतु'
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केंद्र सरकार ऐलान किया है कि प्रस्तावित सेतुसमुद्रम शिपिंग कैनाल प्रोजेक्ट के लिए किसी भी सूरत में ‘राम सेतु’ को नहीं तोड़ा जाएगा। फिलहाल सेतुसमुद्रम का मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।
सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने लोकसभा में कहा कि ‘राम सेतु’ को तोड़े बगैर ही सरकार बेहतर परिवहन और नेविगेशन प्रणाली विकसित करेगी। यह भी बताया कि सरकार के पास कई विकल्प हैं जिनसे सुप्रीम कोर्ट को अवगत कराया जाएगा।
गडकरी के मुताबिक ‘राम सेतु’ पहले से ही ज्ञात संरचना है जिसे एनडीए सरकार नहीं तोड़ेगी। ‘राम सेतु’ की उत्पत्ति को लेकर अलग-अलग भूगर्भीय और धार्मिक सिद्धांत दिए गए हैं।
लोकसभा में बोले नितिन गडकरी
गौरतलब है कि पूर्व में प्रस्तावित सेतुसमुद्रम शिपिंग कैनाल प्रोजेक्ट के तहत बड़े पोतों की आवाजाही और तटवर्ती इलाकों में मत्स्य और नौपरिवहन बंदरगाह स्थापित करने के लिए पूरे समुद्री इलाके की खुदाई करने का सुझाव है।
इससे जहाज सीधे देश के पूर्वी तटों पर पहुंच सकेंगे। अभी पश्चिम से आने वाले जहाजों को तूतीकारेन, चेन्नई, विशाखापत्तनम, पारादीप आदि बंदरगाहों पर पहुंचने के लिए पूरे श्रीलंका द्वीप का चक्कर लगाना पड़ता है।
इस बाबत पूछे जाने पर गडकरी ने बताया कि सरकार एक जलमार्ग योजना तैयार कर रही है ताकि नौपरिवहन को सुगम बनाया जा सके। यह भी जोड़ा कि प्रति किलोमीटर जल परिवहन की लागत 50 पैसे, ट्रेन परिवहन की लागत एक रुपये और सड़क परिवहन की लागत डेढ़ रुपये है।