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घरों से मांगते हैं बेकार लकड़ी, गरीब बच्चों के लिए बनवाते हैं स्टूल

Tue, 09 Feb 2016 08:46 AM IST
Updated Tue, 09 Feb 2016 08:46 AM IST
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ram gopal gupta helping poor children by making stool for them

जिस उम्र में लोग अपनी चिंता में घुले जाते हैं उस उम्र में एक शख्स ग़रीब बच्चों की चिंता में लगा हुआ है। बिना किसी स्वार्थ के। कभी उनके लिए स्टूल बनवाता है तो कभी कपड़े इकट्ठे करता है।

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मयूर विहार फेज-1 में ही रहने वाले 72 वर्षीय राम गोपाल गुप्ता न होते तो शायद बच्चे एक पेड़ के नीचे ही कड़ाके की ठंड में पढ़ रहे होते। लेकिन उन्होंने बच्चों के स्कूल को ही बदल दिया है।
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इस स्कूल का नाम बनफूल प्राथमिक विद्यालय है जो दिल्ली के मयूर विहार फेज-1 के यमुना खादर क्षेत्र में है। एक पेड़ के नीचे चंद बच्चों से शुरू हुए इस स्कूल में इस समय करीब 1000 बच्चे हैं। बच्चे बहुत ही गरीब घरों से हैं, जिसके चलते उनके पास सुविधाओं का अभाव बना रहता है।
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banfool school

ऐसे में मयूर विहार फेज-1 में ही रहने वाले 72 वर्षीय राम गोपाल गुप्ता ने इन गरीब घरों से आने वाले बच्चों को एक अच्छा भविष्य देने में मदद की। गुप्ता जी ने इन बच्चों को कपड़े, स्वेटर, स्टेशनरी और कभी-कभी आर्थिक सहायता भी प्रदान की। वे स्कूल के बच्चों को करीब 150 स्वेटर दान कर चुके हैं।

ठंड का मौसम शुरू होते ही जमीन पर बैठकर पढ़ते इन बच्चों को देखकर उन्होंने सोचा कि कैसे इन बच्चों के लिए बैठने का इंतजाम किया जाए। इसके बाद उन्होंने बच्चों को स्टूल देने का निर्णय लिया।

70-80 स्टूल कर चुके हैं दान

ram gopal gupta helping poor children by making stool for them

गुप्ताजी की इस नेक सोच में आड़े आई पैसों की दिक्कत। आखिर इतने सारे बच्चों को स्टूल मुहैया कराना कोई आसान काम नहीं था। ऐसे में उन्होंने एक मुहिम शुरू की, जिसके तहत उन्होंने अपने रिश्तेदारों और पड़ोसियों से उनके घर में पड़ी बेकार लकड़ी फेंकने के बजाए उन्हें दे देने को कहा।

लोगों के घरों से मिली बेकार लड़की का इस्तेमाल करके गुप्ताजी अब तक करीब 70-80 स्टूल बनवा चुके हैं। जो लकड़ी लोगों के लिए कूड़े जैसी थी, उसे इन्होंने बच्चों की जरूरत का सामान बना डाला।

banfool school

अपनी इस मुहिम के तहत वे न केवल लोगों से घर की खराब लकड़ी मांगते हैं, बल्कि उनके पुराने कपड़े भी मांगते हैं, जिसे अक्सर लोग खराब मानकर फेंक दिया करते हैं। इन कपड़ों को वे जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाते हैं। इन कपड़ों को जरूरतमंद लोगों को देने से पहले वे फटे कपड़ों को सिलवाते हैं और गंदे कपड़ों को धुलवाते भी हैं।

औरों ने भी बढ़ाए मदद के हाथ

ram gopal gupta helping poor children by making stool for them

इसके अलावा पिछले करीब 10 सालों से वे अपने घरे के आस पास काम करने वाले गार्ड और अन्य मजदूरों को रोजाना सुबह 6 बजे के करीब चाय पिलाने का काम कर रहे हैं।

सन् 2000 में रिटायर हो चुके राम गोपाल गुप्ता ने अपने परिवार की परंपरा को कायम रखते हुए लोगों की मदद के लिए खुद को समर्पित कर दिया है। उनका कहना है कि उनके पिता भी इसी तरह लोगों की मदद किया करते थे।

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गुप्ता जी के साथ-साथ 'शब्द' नाम का एनजीओ चलाने वाले दिल्ली हाई कोर्ट के वकील आर के सक्सेना भी स्कूल को सरकार की तरफ से सुविधाएं दिलवाने की भरपूर कोशिश कर रहे हैं।

इस संबंध में वे मनीष सिसौदिया को एक पत्र भी लिख चुके हैं, हालांकि अभी तक इस स्कूल को दिल्ली सरकार की तरफ से कोई सुविधा नहीं मिल सकी है।

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गुप्ताजी का कहते हैं- 'साथी हाथ बढ़ाना, एक अकेला थक जाएगा मिलकर बोझ उठाना।' इस मुहिम में आप भी अगर कुछ योगदान करना चाहें तो 011-22751681, 9968513843, 9818814002 या jigsgupta73@gmail.com पर गुप्ताजी से संपर्क कर सकते हैं।

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