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यादव सिंह से लेन-देन पर रामगोपाल-अक्षय का इंकार

Sat, 12 Sep 2015 05:47 PM IST
Updated Sat, 12 Sep 2015 05:47 PM IST
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Ram Gopal and Akshay Yadav denies any link with Yadav Singh

उत्तर प्रदेश के विवादास्पद इंजीनियर यादव सिंह से कारोबारी रिश्तों के आरोपों को लेकर सपा महासचिव राम गोपाल यादव और उनके बेटे अक्षय यादव दोनों ने इंकार किया है। राम गोपाल यादव ने कहा है कि यादव सिंह से रिश्तों की बात 100 फीसदी गलत है।

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उन्होंने कहा कि यादव सिंह मामले में जांच जारी है और हर चीज स्पष्ट है। वहीं उनके बेटे और फिरोजबाद से सांसद अक्षय सिंह ने कहा कि उनका यादव सिंह से कोई कारोबारी रिश्ता नहीं है। यादव सिंह से कारोबारी रिश्तों के आरोपों को लेकर भले ही इंकार किया जा रहा हो। मगर समाजवादी पार्टी के अंदर इन आरोपों को लेकर खलबली मची हुई है।
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समाजवादी पार्टी में मुलायम सिंह और अखिलेश यादव के बाद नंबर दो पर माने जाने वाले रामगोपाल पर आरोपों को लेकर सियासत गरमा गई है।

रामगोपाल यादव और उनके बेटे पर आरोप लगने से कुछ दिन पहले मुलायम सिंह यादव जनता परिवार से नाराज होकर अलग हो चुके हैं। रामगोपाल यादव ने ही जनता परिवार से अलग होने का ऐलान किया था।
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यादव के कारण छोड़ा जनता परिवार का साथ!

Ram Gopal and Akshay Yadav denies any link with Yadav Singh

जनता परिवार से हटने के सपा के निर्णय को राजनीतिक गलियारों में यादव सिंह पर सीबीआई शिकंजा कसने से जोड़ा जा रहा था। उस समय भी रामगोपाल यादव से सीधे सवाल किए गए थे कि क्या यादव सिंह को लेकर भाजपा और मोदी सरकार से कोई डील तो नहीं हुई है। तब भी यादव ने इसे सिरे से खारिज किया था।

रामगोपाल यादव राज्यसभा में सपा के नेता हैं। दिल्ली में सपा की सियासत के प्रमुख कर्त्ता धर्ता वही माने जाते हैं।

दरअसल, मीडिया में खुलासा किया गया है कि मुलायम सिंह के भतीजे और सपा महासचिव रामगोपाल यादव के बेटे व फिरोजाबाद से सांसद अक्षय यादव के यादव सिंह से कारोबारी रिश्ते हैं।

मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि अक्षय यादव ने यादव सिंह के सहयोगी से एनएम बिल्डवेल नाम की कंपनी के शेयर लिए थे। खुलासे में कहा गया है कि अक्षय ने सितंबर 2013 में एनएम बिल्डवेल कंपनी के 9 हजार 995 शेयर यादव सिंह के सहयोगी राजेश मनोचा से दस रुपये के भाव पर खरीदे थे। पांच शेयर अक्षय की पत्नी ऋचा के नाम स्थानांतरित हुए थे। उस समय इस कंपनी के शेयर की कीमत लगभग 2050 रुपये होनी चाहिए थी।

इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने सस्पेंड चल रहे यादव सिंह को नोएडा अथॉरिटी में बहाल कर दिया था।

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